धूमधाम से मनाया गया जीकेसी का वार्षिक वर्षगांठ

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गया। शहर के रामसागर रोड में स्थित बहुआर चौरा मोहल्ला में गुरुवार को ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस के जिला कार्यालय में जिलाध्यक्ष सह गया नगर निगम के वार्ड पार्षद संजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में जीकेसी के वार्षिक वर्षगांठ केक काट कर धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बीते वर्ष गया जिले के सभी कायस्थ परिवार के साथ जीकेसी के साथ जुड़े थे। हमलोगों के जुड़ने के साथ ही बीते साल जीकेसी का वर्षगांठ मनाया था। इस बार ग्लोबल स्तर पर मनाया जा रहा है। इसी क्रम में गया जिला के कायस्थ परिवार के साथ जीकेसी का वर्षगांठ केक काट कर धूमधाम से मनाया गया है। हम सभी जानते हैं कि आज कायस्थ समाज की राजनीतिक स्थिति इस समय नगण्य है। देश प्रदेश सभी जगह हमारे समाज की हालत बद  से बदतर होती जा रही है । एक समय था जब हमारा कायस्थ समाज आधे विश्व पर राज करता था और ये राज काज बहुत समय तक रहा। मुगल शासन मे भी हम लोग अपने आप को स्थापित किए रहे उस समय भी हम लोगो का बहुत ही बड़ा सम्मान और राजनीतिक समावेश रहा और हमारा अस्तित्व बहुत ही दमदार था। अंग्रेज काल में भी हम लोग ऊचे पदों पर रहे हैं।लेकिन राजनीतिक आधार कम होने लगा। लेकिन जैसे ही हम लोगो ने नब्बे के दशक में प्रवेश किया वैसे ही हमारी प्रगति, हमारे संबंध, हमारी राजनीतिक जमीन आदि धीरे धीरे खत्म होने लगे। श्री सिन्हा ने कहा कि हम लोग सिमटने लगे और ये क्रम आज भी बदस्तूर जारी है। इसी दशक में कायस्थ समाज में बहुत सी संस्थाओ ने जन्म लिया।  उन्होने अपने यहां पद और पदाधिकारी तो बनाए लेकिन कार्यकर्ता नहीं बनाए। इन संस्थाओ ने वायदो का पिटारा तो खोला लेकिन सब आधारहीन यह संस्थाएं राजनीतिक एवं सामाजिक विकास एवं आधार देने मे नाकामयाब रहे । आज हम अपना राजनीतिक आधार पूरी तरह से खो चुके हैं । एक समय जो आखरी पंक्ति में खड़े हुए लोग थे । वो हमसे आगे खड़े हो गए हैं। आज हम लोगो की जरूरत है कि राजनीतिक रूप से आगे आए दमदार उपस्थित दर्ज कराए। राजनीति में स्थापित हो लेकिन ये तभी संभव है जब हम लोग आपस में चर्चा करे, एक स्वस्थ संवाद हो अपने विचार रखे जिससे लोगो के संबंध मधुर हो तथा प्रगाढ़ता आए। अगर आज हम लोग  अपने हक और अधिकारों के लिए जागरूक नहीं हुए तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा अस्तित्व नकार खाने की तूती बन जायेगा, हालाकि अभी भी वो ही हाल है। लेकिन हल्की सी आवाज आ रही है वे भी बंद हो जाएगी और राजनीतिक हिस्सेदारी एक सपना बन कर रह जाएगी। राजनीतिक हिस्सेदारी से आधी समस्याएं स्वतः ही समाप्त हो जाती है या ये कह सकते कि राजनीतिक हिस्सेदारी समस्या हल करने की चाबी है। आज हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि हम लोगो को  राजनीति में आए और पकड़ मजबूत बनाए हैं। इस मौके पर चित्रांश सुनील कुमार सिन्हा उर्फ प्रभात शंकर, नवीन बिहार प्रसाद उर्फ झुन्ना, मनोज कुमार, सुजीत कुमार अम्बष्ट, नवीन कुमार सिन्हा, रंजन सिन्हा, सुमित कुमार सिन्हा, राजीव कुमार सिन्हा, कुमुद रंजन, अधिवक्ता अरुण कुमार सिन्हा, अनूप कुमार, रौशन कुमार सिन्हा, प्रदीप कुमार, शुभम सिन्हा, अभिराज सिन्हा, अधिवक्ता मनोज कुमार आदि मौजूद थे।
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