कैमूर। सृष्टि के रचयिता एवं निर्माण-कला के अधिष्ठाता भगवान विश्वकर्मा की पूजा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। पूजा को लेकर कारीगरों, शिल्पकारों, व्यवसायियों और विभिन्न संस्थानों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
समाजसेवी कमलेश शर्मा ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा को कारीगरों, शिल्पकारों, वास्तुकारों और इंजीनियरों का आराध्य देव माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने चारों युगों में कई प्रसिद्ध नगरों और महलों का निर्माण किया। सतयुग में स्वर्ग लोक, त्रेतायुग में सोने की लंका और द्वापरयुग में द्वारिका के निर्माण का श्रेय भी भगवान विश्वकर्मा को दिया जाता है।
मान्यता है कि भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और इंद्र का वज्र भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था। यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मशीनों, औजारों और निर्माण से जुड़े उपकरणों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, उद्योगों, कार्यालयों, दुकानों और विभिन्न प्रतिष्ठानों में मशीनों, औजारों एवं वाहनों की पूजा की जाती है। श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा से व्यवसाय में उन्नति, कार्यों में सफलता और मशीनों एवं उपकरणों की सुरक्षा की कामना करते हैं।
दुर्गा मंदिर में आयोजित होने वाले विश्वकर्मा पूजा कार्यक्रम के सफल आयोजन की जिम्मेदारी स्थानीय समिति के सदस्यों ने संभाली है। कार्यक्रम के प्रबंधन एवं देखरेख में अध्यक्ष मुन्ना शर्मा, सचिव शशिकांत विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष मनोज शर्मा के साथ बबलू शर्मा, रामआसरे विश्वकर्मा, विजयी शर्मा सहित अन्य लोग सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
पूजा को लेकर आयोजन स्थल पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं के पहुंचने और पूजा-अर्चना को लेकर भी व्यवस्था की जा रही है। आयोजकों ने लोगों से श्रद्धा और उत्साह के साथ विश्वकर्मा पूजा में शामिल होने की अपील की है।
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