कैमूर। जिले में संचालित 15 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूलों) की शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने को लेकर जिला प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। बुधवार को समाहरणालय में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में मॉडल स्कूलों के प्रधानाध्यापकों, नामित जिला वरीय पदाधिकारियों, नोडल पदाधिकारियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्कूलों के सफल संचालन और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए।
जिला पदाधिकारी ने सभी नोडल पदाधिकारियों को संबंधित विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण कर वास्तविक जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर विकास योजनाओं का चयन करने को कहा। ग्राम सभा के माध्यम से ‘सेवा संकल्प’ और ‘कायाकल्प’ के तहत मनरेगा समेत अन्य योजनाओं को विद्यालयों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में विद्यालयों में उपलब्ध छात्र कोष और विकास कोष की राशि का छात्रहित तथा विद्यालय के विकास में प्राथमिकता के आधार पर उपयोग करने का निर्देश दिया गया। वहीं स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग से स्कूलों में आधारभूत संरचनाओं से जुड़ी योजनाओं का चयन कराने को कहा गया।
विद्यालयों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए प्राक्कलन तैयार कर बिहार राज्य आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड को प्रस्ताव और अनुशंसा भेजने का भी निर्देश दिया गया।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की 100% उपस्थिति पर जोर
समीक्षा बैठक में विद्यार्थियों और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही सभी कक्षाओं का समय पर संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
विद्यालयों में पुस्तकालय, प्रयोगशाला, आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास को नियमित एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने को कहा गया, ताकि आधुनिक तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण सुविधा मिल सके।
अतिक्रमण मिला तो होगी कार्रवाई
मॉडल स्कूलों की भूमि पर स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण की स्थिति में उसे तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए संबंधित भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
इसके अलावा सभी विद्यार्थियों का ‘Filo App’ पर अनिवार्य पंजीकरण कराने और ऐप का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। जिला पदाधिकारी ने नोडल पदाधिकारियों और प्रधानाध्यापकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मॉडल स्कूलों को आधुनिक और उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

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