कैमूर : मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में GNM से मारपीट का आरोप, SDM से कार्रवाई की गुहार

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मोहनिया/कैमूर। मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत एक GNM ने साथी कर्मियों पर मारपीट और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना को लेकर अस्पताल कर्मियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। पीड़ित GNM वीणा कुमारी ने पूरे मामले की शिकायत मोहनिया अनुमंडल पदाधिकारी से करते हुए आरोपितों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने घटना की वास्तविकता सामने लाने के लिए अस्पताल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की है।

पीड़िता के अनुसार, वह मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल के दवा वितरण कक्ष में अपनी ड्यूटी कर रही थीं। इसी दौरान अस्पताल में पदस्थापित GNM कांति जायसवाल, निभा कुमारी और सुजीत कुमार वहां पहुंचे। आरोप है कि तीनों के साथ किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। मामला बढ़ने पर पीड़िता ने वरीय चिकित्सा पदाधिकारी को मोबाइल फोन के माध्यम से सूचना देने का प्रयास किया।

वीणा कुमारी का आरोप है कि इसी दौरान कांति जायसवाल ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया और उनके साथ मारपीट की। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य दो लोगों ने उन्हें पकड़ रखा था। पीड़िता ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि कांति जायसवाल उस दिन ड्यूटी पर नहीं थीं, बावजूद इसके वह अस्पताल पहुंचीं और उनके साथ विवाद एवं मारपीट की घटना हुई।

घटना के बाद पीड़िता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मोहनिया एसडीएम के समक्ष आवेदन दिया। आवेदन में उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। खास बात यह है कि पीड़िता ने जांच के लिए अस्पताल परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए उसकी जांच कराने का अनुरोध किया है।

इस मामले के सामने आने के बाद अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं। हालांकि, घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

वहीं, मोहनिया एसडीएम ने बताया कि पीड़िता की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है। CCTV फुटेज और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवा वितरण कक्ष में आखिर किस परिस्थिति में विवाद हुआ और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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