मोतिहारी। डॉo राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, पिपराकोठी द्वारा 1 से 3 सितम्बर, 2026 तक महात्मा गांधी सभागार, राजा बाजार, मोतिहारी में “कृषि, पशुपालन एवं मात्स्यिकी उद्यमी उन्नति मेला–2026” का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह मेला कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्यिकी, कृषि यंत्रीकरण एवं कृषि आधारित उद्यमिता को एकीकृत करते हुए किसानों, ग्रामीण युवाओं तथा महिला उद्यमियों के लिए वैज्ञानिक ज्ञान, नवाचार और व्यावसायिक अवसरों का सशक्त मंच प्रदान करेगा।
मेला में कृषि, पशुपालन एवं मात्स्यिकी की उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन, उन्नत बीज एवं पौध सामग्री, कृषि आदानों तथा आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी एवं विपणन प्रमुख आकर्षण होंगे। इसके साथ ही ड्रोन एवं जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों का प्रदर्शन, प्राकृतिक खेती एवं श्रीअन्न (मिलेट्स) आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा तथा मूल्य संवर्धित कृषि उत्पादों और स्थानीय उद्यमों को “लोकल फॉर वोकल” के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा।
कार्यक्रम में किसानों एवं महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों के विपणन के साथ-साथ प्रगतिशील कृषकों, पशुपालकों एवं मत्स्य पालकों का सम्मान किया जाएगा। किसान गोष्ठी, प्रश्नोत्तरी, तकनीकी परामर्श, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा कृषि, पशुपालन एवं मात्स्यिकी उद्यमिता से जुड़े समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञ परिचर्चा भी आयोजित होगी।
कार्यक्रम में आई.सी.ए.आर. संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, कृषि स्टार्टअप एवं कृषि उद्योगों की सक्रिय सहभागिता रहेगी। वैज्ञानिकों द्वारा जलवायु-अनुकूल कृषि, उन्नत फसल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, समेकित कृषि प्रणाली, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन, डेयरी एवं मत्स्यिकी आधारित उद्यम तथा आधुनिक कृषि यंत्रीकरण जैसे विषयों पर तकनीकी व्याख्यान एवं विशेषज्ञ परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे।
यह मेला पूर्वी चम्पारण सहित आसपास के जिलों के हजारों किसानों, कृषि उद्यमियों एवं प्रसार कार्यकर्ताओं के लिए “उत्पादन से उद्यम तक” की संपूर्ण श्रृंखला—उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन—से जुड़ने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा। मेले का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि विविधीकरण, ग्रामीण रोजगार सृजन तथा आत्मनिर्भर एवं लाभकारी कृषि उद्यमिता को वैज्ञानिक आधार पर सुदृढ़ करना है।
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