बिहार में गरीबों को मिलेंगे 11.18 लाख पक्के मकान, शिवराज सिंह चौहान ने ₹13,427 करोड़ के महापैकेज का किया ऐलान

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बिहार के ग्रामीण इलाकों में पक्के मकान की उम्मीद लगाए बैठे लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा वित्तीय पैकेज जारी किया है। पटना में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार को 11 लाख 18 हजार 937 नए पक्के मकान बनाने की मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से कुल ₹13,427 करोड़ की भारी-भरकम वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस फैसले से राज्य के सुदूर गांवों में कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आशियाना मिलेगा।

बिहार को मिला सबसे बड़ा आवास पैकेज: 2 वर्षों में 24.30 लाख मकान स्वीकृत

राजधानी पटना में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार सरकार को इस योजना का आधिकारिक स्वीकृति पत्र सौंपा। मंच पर मौजूद गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में उन्होंने 2.35 लाख से अधिक नवनिर्मित मकानों के लाभार्थियों का गृह प्रवेश कराया और उन्हें चाबियां सौंपीं।

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्षों के दौरान अकेले बिहार के लिए कुल 24 लाख 30 हजार 327 मकानों की स्वीकृति दी है, जिस पर कुल ₹29,164 करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पक्का मकान केवल ईंट और सीमेंट से बना ढांचा नहीं होता, बल्कि यह किसी भी गरीब परिवार के आत्मसम्मान, सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी नींव है।

पात्रता नियमों में दी गई बड़ी छूट: अब इन्हें भी मिलेगा पक्का घर

नए सर्वेक्षण के अंतर्गत केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रता नियमों (Eligibility Criteria) में बड़ा संशोधन करते हुए कई पुरानी पाबंदियों को खत्म कर दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण परिवार इसका लाभ ले सकें:

  • दोपहिया वाहन रखने वालों को राहत: नए नियमों के अनुसार, अब परिवार में टू-व्हीलर (मोटरसाइकिल या स्कूटर) होने पर उसे योजना से बाहर (Ineligible) नहीं किया जाएगा।
  • मासिक आय सीमा में बढ़ोतरी: लाभार्थी परिवार की मासिक आय की अधिकतम सीमा को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दिया गया है।
  • कृषि भूमि धारकों को भी मौका: 5 एकड़ तक असिंचित (Unirrigated) या 2.5 एकड़ तक सिंचित कृषि भूमि वाले किसान परिवार भी अब पक्के मकान के लिए पात्र माने जाएंगे।
  • भूमिहीन और जर्जर मकानों के लिए अतिरिक्त सहायता: जिन लाभार्थियों के पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें भूमि खरीदने के लिए ₹1 लाख की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इसके अलावा पुराने और अत्यधिक जर्जर मकानों की मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए ₹80,000 तक की विशेष वित्तीय मदद का प्रावधान रखा गया है।

वित्तीय मॉडल और लाभार्थी को मिलने वाली राशि

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत मैदानी क्षेत्रों में प्रति मकान निर्माण के लिए ₹1.20 लाख की सीधी वित्तीय सहायता डीबीटी (DBT) के माध्यम से किस्तों में दी जाती है। इसके अलावा:

  • मनरेगा के तहत मजदूरी: मकान निर्माण के दौरान लाभार्थी को मनरेगा (MGNREGS) योजना के तहत 90 से 95 दिनों की अकुशल मजदूरी राशि दी जाती है।
  • शौचालय निर्माण अनुदान: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की अतिरिक्त राशि अलग से प्रदान की जाती है।
  • बुनियादी सुविधाएं: हर नए आवास को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (गैस कनेक्शन), सौभाग्य योजना (बिजली कनेक्शन) और जल जीवन मिशन (नल से जल) से सीधे जोड़ा जाता है।

किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए अन्य बड़े ऐलान

इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के सशक्तिकरण से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों पर भी बात की:

  • पीएम फसल बीमा योजना: बिहार में किसानों को प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा और ओलावृष्टि) से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को पूरी मजबूती से लागू करने पर जोर दिया गया।
  • ‘शी-मार्ट’ (She-Marts) की स्थापना: ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ‘जीविका दीदियों’ द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार दिलाने के लिए बिहार के प्रत्येक जिले में आधुनिक ‘शी-मार्ट’ खोले जाएंगे।
  • डिजिटल फार्मर आईडी: कृषि योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए बिहार में अब तक 53 लाख 83 हजार से अधिक किसानों की डिजिटल ‘फार्मर आईडी’ बनाई जा चुकी है।

पारदर्शिता और आवेदन प्रक्रिया की निगरानी

इस योजना के तहत सभी नए आवासों का आवंटन ‘आवास+’ (Awaas+) ऐप और आधुनिक जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) तकनीक के माध्यम से किया जा रहा है, ताकि बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो सके और वास्तविक पात्र लाभार्थियों को ही सरकारी सहायता मिले। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस वित्तीय वर्ष के दौरान निर्माण कार्य को तेजी से पूरा कराने की दिशा में काम कर रही हैं।

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