- 6 देशों में 12 फिल्म फेस्टिवल में आधिकारिक चयन, 67 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से बढ़ा चम्पारण का गौरव
Live News 24×7 के लिए कैलाश गुप्ता।
मोतिहारी (बिहार)। चम्पारण की ऐतिहासिक धरती और 1917 के चम्पारण सत्याग्रह की गौरवगाथा को केंद्र में रखकर निर्मित फिल्म ‘चम्पारण सत्याग्रह’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। युवराज मीडिया एण्ड एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित इस फिल्म को विभिन्न प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों और फिल्म पुरस्कार आयोजनों में अब तक कुल 67 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इसके साथ ही फिल्म का 6 देशों के 12 फिल्म फेस्टिवलों में आधिकारिक चयन हुआ है।
6 देशों के 12 फिल्म फेस्टिवल में आधिकारिक चयन
फिल्म की अंतरराष्ट्रीय यात्रा दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल और भारत समेत 6 देशों तक पहुँची है। फिल्म को अफ्रीकन फिल्म फेस्टिवल, सिंगापुर लायन इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल, क्राउन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल – बंगलादेश, म्यांमार (वर्मा) इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, नेपाल विंग्स इंटरनेशनल क्रिटिक्स फिल्म फेस्टिवल, कन्याकुमारी इंटरनेशनल फ़िल्म अवॉर्डस, इंटरनेशनल ग्रैंड ग्लोरी फ़िल्म अवॉर्डस, इंटरनेशनल स्टार सिने अवॉर्डस, गोवा इंटरनेशनल फ़िल्म कंपटीशन, इंडियन स्क्रीन प्रोजेक्ट,
बिहार महोत्सव दिल्ली, नोएडा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इन 12 फिल्म फेस्टिवलों में फिल्म का आधिकारिक चयन हुआ, जहां फिल्म ने 67 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।”
इतिहास और सामाजिक सरोकार पर केंद्रित फिल्म
‘चम्पारण सत्याग्रह’ केवल एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि सत्य, साहस, अहिंसा और सामाजिक परिवर्तन की उस प्रेरक यात्रा को पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में चम्पारण को विशेष स्थान दिलाया। फिल्म के माध्यम से चम्पारण के इतिहास, संघर्ष और जनभागीदारी को नई पीढ़ी तथा अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है। फिल्म में लगभग 168 कलाकारों ने संवाद और अभिनय के माध्यम से विभिन्न किरदारों को जीवंत किया है। फिल्म में करीब 1000 जूनियर आर्टिस्टों के साथ बैल, घोड़े और हाथी का भी फिल्मांकन किया गया है।”
लेखक अभिनेता निर्देशक डा. राजेश अस्थाना ने कहा
“यह उपलब्धि मेरे लिए ही नहीं, बल्कि पूरी टीम और चम्पारण की धरती के लिए गर्व का विषय है। 67 पुरस्कार और 12 फिल्म फेस्टिवल में चयन इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय इतिहास और हमारी अपनी मिट्टी की कहानियाँ भी विश्व स्तर पर दर्शकों और निर्णायकों को प्रभावित कर सकती हैं। हमारा उद्देश्य चम्पारण सत्याग्रह की भावना, सत्य और सामाजिक परिवर्तन के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।”
फिल्म निर्माण के सन्दर्भ में
डा. अस्थाना ने बताया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महात्मा गांधी के भारत में प्रथम सत्याग्रह के रूप में चम्पारण सत्याग्रह का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। आज की युवा पीढ़ी चम्पारण सत्याग्रह को न के बराबर जानती है। उन्हें यह मालूम नहीं है कि उनके पूर्वजों ने कितनी कुर्बानियां दी हैं। युवा पीढ़ी को इसी इतिहास से अवगत कराने हेतु युवराज मीडिया एण्ड एंटरटेनमेंट द्वारा ’’चम्पारण सत्याग्रह’’ नाम से भव्य फीचर फिल्म बनायी गई है। फिल्म के माध्यम से देश और दुनिया के दर्शकों को चम्पारण के इतिहास के उन अनछुए पहलुओं से रूबरू कराने का प्रयास किया गया है।”
फिल्म चम्पारण सत्याग्रह की टीम
फ़िल्म की सह निर्मात्री डा. सीमा रानी, अस्मिता राज व सुरभि श्रीवास्तव हैं, तो गीतकार चम्पारण के ही गीतों के राजकुमार की उपाधि से विभूषित पंडित अश्विनी कुमार आँसू एवं डा. राजेश अस्थाना हैं। संगीतकार स्नेहाशीष शिबू देब हैं। फ़िल्म में छायांकन अशोक माही, कास्टिंग डायरेक्टर शहज़ाद खान, बिजनेस हेड आकाश मित्तल, प्रोडक्शन हेड सम्राट, स्थिर छायांकन रिंकू गिरी का है तो संपादन मुंबई में बिहार के चर्चित फ़िल्म संपादक कृष्ण मुरारी यादव, पोस्ट प्रोडक्शन जी फोकस स्टूडियो मुम्बई, डी आई संपादन राज मिनरुल, वीएफएक्स व क्रोमा रविन्द्र कुमार मौर्य, थ्री डी सुरेन्द्र पंडित, मिक्सिंग शाहनवाज़, साउंड डिजाइन राजा यादव पीआरओ समरजीत हैं।
1917 के चम्पारण सत्याग्रह और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म की यह उपलब्धि बिहार के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सिनेमाई महत्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करती है। चम्पारण की धरती से निकली यह कहानी अब पुरस्कारों और फिल्म समारोहों के माध्यम से देश-विदेश में अपनी पहचान बना रही है।
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