अंतरराष्ट्रीय कानूनी गलियारों और भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण मामलों से जुड़ी इस समय की एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के कानूनी मामलों को संभालने वाले उसके मुख्य वकील पर ब्रिटेन में मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। यूनाइटेड किंगडम (UK) की इमिग्रेशन और बॉर्डर एजेंसी ने मेहुल चोकसी के वकील को लंदन में हिरासत में ले लिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद कानूनी और राजनीतिक जगत में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि भगोड़े आरोपियों का बचाव करने वाले वकीलों पर इस तरह की सख्त कार्रवाई होना अपने आप में एक बहुत बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
वर्क परमिट और वीजा नियमों के उल्लंघन का है पूरा मामला
ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा की गई इस कार्रवाई के पीछे मुख्य वजह वर्क परमिट और यूके के आव्रजन नियमों (Immigration Rules) का उल्लंघन बताया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेहुल चोकसी के यह वकील लंदन में रहकर उनके कानूनी दांवपेंच और प्रत्यर्पण मामलों की पैरवी संभाल रहे थे। हालांकि, यूके के होम ऑफिस और इमिग्रेशन विभाग को उनके वीजा स्टेटस, वर्क परमिट की शर्तों और देश में रहने की कानूनी वैधता को लेकर कुछ गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। इसके बाद नियमों के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस घटना से ब्रिटेन में वकीलों और विदेशी प्रवासियों के लिए लागू होने वाले कड़े कानूनों की सख्ती एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।
मेहुल चोकसी के कानूनी डिफेंस पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा?
मेहुल चोकसी लंबे समय से कैरिबियाई देश एंटीगुआ और बारबुडा में रह रहा है, और भारत सरकार लगातार उसे वापस लाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है। ऐसे समय में जब उसकी कानूनी टीम के मुख्य सदस्य और वकील ही ब्रिटेन में इमिग्रेशन संकट में फंस गए हैं, तो चोकसी के लिए अपनी कानूनी रणनीतियों को जारी रखना बेहद मुश्किल हो सकता है। जानकारों का मानना है कि जब मुख्य वकीलों का इस तरह से कानूनी पचड़ों में फंसना होता है, तो उससे क्लाइंट के मामलों की पैरवी और अदालती गतिविधियों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस घटनाक्रम को भारत की जांच एजेंसियों और कानूनी मोर्चे के लिए भी एक बड़ी राहत और सकारात्मक विकास के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय आव्रजन कानून और वकीलों की जवाबदेही
यह पूरा मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे पश्चिमी देश विशेषकर यूनाइटेड किंगडम अपनी सीमाओं के भीतर रहने वाले विदेशी नागरिकों और उनके व्यावसायिक या कानूनी कार्यों को लेकर बेहद सतर्क और सख्त हो चुके हैं। चाहे कोई व्यक्ति किसी हाई-प्रोफाइल भगोड़े का वकील ही क्यों न हो, यदि वह स्थानीय देश के इमिग्रेशन नियमों या वर्क परमिट की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, तो कानून किसी के लिए भी नरमी नहीं बरतता। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ब्रिटेन का इमिग्रेशन विभाग इस मामले में क्या अंतिम निर्णय लेता है और इसका असर मेहुल चोकसी के खिलाफ चल रहे वैश्विक कानूनी मामलों पर किस रूप में पड़ता है।
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