नेपाल में आई भीषण प्रलय में फंसे सैकड़ों विदेशी सैलानी, लापता लोगों में सबसे ज्यादा भारतीय; रेस्क्यू के लिए सेना का महा-ऑपरेशन शुरू

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नेपाल के हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रकृति के रौद्र रूप ने भारी तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) और भारी भूस्खलन के कारण सैकड़ों लोग संकट में घिर गए हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में नेपाल के स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ दुनिया भर के सैकड़ों विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री फंस गए हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, लापता और संपर्क से कटे लोगों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और भारतीय दूतावास ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर सबसे बड़ा संकट

बाढ़ और मलबे की चपेट में आया रसुवागढ़ी मार्ग भारत से तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों का सबसे प्रमुख और व्यस्त ट्रांजिट रूट है। करीब पांच वर्षों के अंतराल के बाद बड़े पैमाने पर निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से इस मार्ग से तीर्थयात्रा शुरू की गई थी। बुधवार सुबह जब यात्री अपने पड़ावों से आगे बढ़ रहे थे, तभी भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक विकराल रूप धारण कर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, 380 से अधिक लापता व संपर्कविहीन यात्रियों में से 130 से अधिक भारतीय नागरिक और एनआरआई शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड्स के सैलानी भी इस आपदा के चलते प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए हैं।

जमींदोज हुआ बुनियादी ढांचा और संपर्क टूटा

इस आपदा ने पूरे सीमावर्ती इलाके के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। नेपाल और चीन (तिब्बत) को जोड़ने वाला ऐतिहासिक मितेरी पुल (फ्रेंडशिप ब्रिज) पानी के तेज बहाव में बह गया है। इसके साथ ही 19 से अधिक महत्वपूर्ण मोटर वाहन पुल और 40 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। रसुवा और धाडिंग जिलों में मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और बिजली आपूर्ति ठप हो जाने से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों से संपर्क साधना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। क्षेत्र में काम कर रही कई जलविद्युत परियोजनाओं (Hydropower Projects) को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।

हेलीकॉप्टर और स्निफर डॉग्स के साथ महा-रेस्क्यू ऑपरेशन

हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और विशेष आपदा प्रबंधन इकाइयों को जमीन पर उतार दिया है। दुर्गम पहाड़ी इलाका होने और सड़क मार्ग पूरी तरह कट जाने के कारण हवाई मार्ग से बचाव कार्य चलाया जा रहा है। बचाव अभियान में 14 से अधिक हेलीकॉप्टर, आधुनिक ड्रोन कैमरे और खोजी कुत्ते (Sniffer Dogs) तैनात किए गए हैं। नुवाकोट और धाडिंग के आर्मी बैरक्स में हेलीकॉप्टरों के लिए आपातकालीन ईंधन डिपो और मोबाइल एयरबेस बनाए गए हैं, ताकि राहत उड़ानों में किसी प्रकार का विलंब न हो। गंभीर रूप से घायल लोगों को एयरलिफ्ट कर काठमांडू के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है, जबकि अन्य के लिए रसुवा में विशेष मेडिकल कैंप स्थापित किए गए हैं।

भारत सरकार सतर्क, जारी किए गए 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार और विदेश मंत्रालय लगातार काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर वार्ता कर जानमाल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त की और भारत की ओर से मानवीय सहायता व राहत दलों की तैनाती की पूरी पेशकश की है।

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीयों और उनके चिंतित परिजनों के लिए 24 घंटे सक्रिय रहने वाले आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

  • भारतीय दूतावास (काठमांडू) हेल्पलाइन: +977 985 131 6807, +977 970 910 7500

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र समेत कई राज्य सरकारों ने भी अपने नागरिकों की कुशलक्षेम जानने और सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं:

  • उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन टोल-फ्री: 1070 / 0522-2238200
  • उत्तराखंड आपदा कंट्रोल रूम: 1070 / 0135-2710334
  • महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन: 022-22027990
  • छत्तीसगढ़ आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन: 1070 / +91-771-2223471

भारत के सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट और स्थानीय प्रभाव

नेपाल की नदियों में आए इस उफान का सीधा भौगोलिक असर भारत के सीमावर्ती मैदानी राज्यों पर भी पड़ने की संभावना है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों का पानी आगे चलकर गंडक और कोसी नदी प्रणालियों में मिलता है। इसके चलते उत्तर प्रदेश के महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर तथा बिहार के पश्चिमी चंपारण और सीमावर्ती जिलों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। निचले इलाकों में नदी किनारे बसे गांवों में सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है और जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।

मौसम में सुधार के साथ बचाव अभियान में तेजी की उम्मीद

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, जैसे ही उच्च हिमालयी घाटियों में मौसम साफ होगा और बादलों की दृश्यता बेहतर होगी, रेस्क्यू उड़ानों की आवृत्ति और बढ़ाई जाएगी। टूर ऑपरेटरों और गाइडों के नेटवर्क के जरिए ट्रैकिंग रूट्स पर फंसे एक-एक यात्री की सही लोकेशन को मैप किया जा रहा है। भारत और नेपाल की एजेंसियां मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि सभी फंसे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सुरक्षित निकालकर उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।

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