गिरिडीह में ‘खाकी’ का दमदार असर, डॉ. विमल कुमार की रणनीति ने पुलिसिंग को दी नई धार

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  • देश के 100 सर्वश्रेष्ठ IPS अधिकारियों में शामिल डॉ. विमल कुमार की अगुवाई में गिरिडीह पुलिस ने गढ़े सफलता के नए आयाम
गिरिडीह: देश के सर्वश्रेष्ठ 100 आईपीएस अधिकारियों की सूची में शामिल डॉ. विमल कुमार का गिरिडीह में कार्यकाल सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। रामगढ़ के पूर्व एसपी और वर्तमान में गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार की कुशल कार्यशैली, अपराध के खिलाफ सख्त रणनीति, तकनीक आधारित पुलिसिंग और आम लोगों से सीधा संवाद उनकी कार्यप्रणाली की पहचान बन चुकी है। गिरिडीह पुलिस की जनवरी से जून 2026 तक की उपलब्धियों का दस्तावेज इसकी स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। ऐसे में आने वाले समय में देश के सर्वश्रेष्ठ 25 आईपीएस अधिकारियों की सूची में भी डॉ. विमल कुमार का नाम शामिल हो जाए तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार, गिरिडीह बना नक्सलमुक्त जिला
डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में गिरिडीह पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की। पुलिस के अनुसार लगातार गश्त, सघन अभियान और सुरक्षा बलों के साथ बेहतर समन्वय का परिणाम है कि गिरिडीह को नक्सलमुक्त जिला होने का गौरव मिला। अभियान के दौरान हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी ने नक्सली गतिविधियों की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
नक्सल अभियान में हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
6 फरवरी 2026 को खुखरा थाना क्षेत्र में अभियान के दौरान 11 .303 राइफल, 9 .22 राइफल, 6 ग्रेनेड, एक SLR ग्रेनेड प्रोजेक्टर, एक एम्युनिशन बॉक्स और 30 चार्जर क्लिप सहित अन्य सामग्री बरामद की गई। वहीं अप्रैल में पारसनाथ क्षेत्र में भी नक्सल गतिविधियों से जुड़ी सामग्री के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया गया।
अपराधियों पर चौतरफा शिकंजा, 651 गिरफ्तार
जनवरी से जून 2026 के दौरान विभिन्न कांडों में 651 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई, जबकि 220 वारंटियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की विशेष कार्रवाई के दौरान साइबर अपराध, संपत्ति संबंधी अपराध, POCSO और अन्य अपराधों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया।
साइबर अपराधियों पर तकनीक से वार
साइबर अपराध के खिलाफ गिरिडीह पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और त्वरित कार्रवाई को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ मोबाइल फोन और सिम कार्ड समेत डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। पुलिस की तकनीकी सक्रियता ने अपराध के नए तरीकों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।
500 से अधिक मोबाइल बरामद, परिवारों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
गिरिडीह पुलिस की जनहितकारी पहल ‘खोया मोबाइल और लौटी मुस्कान’ अभियान भी खासा प्रभावी रहा। तकनीकी अनुसंधान के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों से 500 से अधिक खोए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए गए। इससे पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास और मजबूत हुआ।
लापता बच्चों की तलाश में भी संवेदनशील पुलिसिंग
ऑपरेशन मुस्कान और रेस्क्यू ड्राइव के तहत पुलिस ने लापता बच्चों और अन्य लोगों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाने का काम किया। जनवरी से जून के बीच दर्ज मामलों में लापता लोगों की तलाश कर बरामदगी की गई।
महिला और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर गिरिडीह पुलिस ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। POCSO मामलों में त्वरित अनुसंधान, महिला शक्ति पेट्रोलिंग और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी के जरिए महिलाओं और छात्राओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने का प्रयास किया गया।
डायल-112 का रिस्पांस टाइम 10 मिनट से भी कम
आपात स्थिति में त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी गिरिडीह पुलिस ने उल्लेखनीय सुधार किया। पुलिस के अनुसार डायल-112 का औसत रिस्पांस टाइम 10 मिनट से भी कम किया गया है। इससे आपात परिस्थितियों में आम लोगों तक पुलिस की पहुंच और तेज हुई है।
स्मार्ट पुलिसिंग से मजबूत हुई मॉनिटरिंग
एसपी कार्यालय में आधुनिक डेटा सेंटर की शुरुआत कर अपराध और अनुसंधान से संबंधित मामलों की डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था मजबूत की गई। इससे लंबित मामलों की समीक्षा, जांच की प्रगति और अधिकारियों की जवाबदेही पर लगातार नजर रखने में मदद मिल रही है।
जनता से सीधा संवाद, गांवों तक पहुंची पुलिस
डॉ. विमल कुमार की कार्यशैली में अपराध नियंत्रण के साथ जनसरोकार भी प्रमुखता से दिखाई देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में औचक भ्रमण और जनता से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनने तथा मौके पर समाधान की पहल की गई। इस पहल का उद्देश्य पुलिस और जनता के बीच भरोसे को और मजबूत करना है।
सख्त अपराध नियंत्रण से लेकर संवेदनशील पुलिसिंग तक—हर मोर्चे पर असर
गिरिडीह पुलिस की छह महीने की उपलब्धियां बताती हैं कि डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में पुलिसिंग केवल अपराधियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि नक्सल विरोधी अभियान, साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा, त्वरित अनुसंधान, तकनीकी पुलिसिंग, जनसंवाद और आपातकालीन सेवाओं को भी समान प्राथमिकता दी गई है।
डॉ. विमल कुमार की यही बहुआयामी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। खाकी की सख्ती के साथ जनता के प्रति संवेदनशीलता और तकनीक के साथ अपराधियों पर प्रहार—गिरिडीह मॉडल की यही पहचान बनती जा रही है। सफलता का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा तो देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों में डॉ. विमल कुमार की पहचान और मजबूत होना तय माना जा सकता है।
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