- राजा कोलियरी में दर्जनों अवैध मुहाने मिलने का दावा मोटे केबल से मोटर-ड्रिल चलाकर धरती के नीचे काटा जा रहा था कोयला, CISF-ECL की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
धनबाद (निरसा): ईसीएल की राजा कोलियरी में कथित अवैध खनन की शिकायत ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत की जमीनी हकीकत जानने के लिए माले विधायक अरूप चटर्जी स्वयं खदान के अंदर पहुंचे। बताया गया कि खदान के भीतर का दृश्य देखकर वे भी हैरान रह गए। अंदर कई स्थानों पर कथित तौर पर अवैध खनन के मुहाने दिखाई दिए, जहां जमीन के नीचे से कोयला निकालने की गतिविधियां चलने की बात सामने आई।
बताया जा रहा है कि अवैध खनन के लिए बिजली के कनेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप है कि मोटे बिजली के केबल के जरिए मोटर और ड्रिल मशीनें संचालित की जा रही थीं। खदान के अंदर कोयला काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण और अन्य सामान भी मौजूद होने की बात कही गई है। वहीं, मौके पर मोटरसाइकिल के जरिए कोयला ढोने वाले लोगों की गतिविधियां भी दिखाई देने का दावा किया गया।
दर्जनों अवैध मुहाने मिले तो निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
सबसे गंभीर सवाल खदान की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। यदि खदान के अंदर इतने बड़े पैमाने पर कथित अवैध मुहाने तैयार किए गए थे और बिजली के केबल बिछाकर मोटर एवं ड्रिल मशीनें चलाई जा रही थीं, तो नियमित निगरानी के बावजूद इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची?
अवैध खनन के लिए मुहाने तैयार करना, बिजली की व्यवस्था करना और उपकरणों को खदान के अंदर पहुंचाना कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती। ऐसे में सवाल यह भी है कि गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और इनके पीछे कौन लोग सक्रिय थे।
विधायक के पहुंचने के बाद हरकत में आया अमला
मामले की जानकारी मिलने के बाद CISF और ECL प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची। संयुक्त कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर मोटे बिजली के केबल, मोटर, कटर तथा कोयला काटने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए गए। इसके बाद अवैध मुहानों को बंद अथवा भरने की कार्रवाई भी शुरू की गई।
कार्रवाई के बाद अब निगाह इस बात पर है कि बरामद उपकरण और मौके की स्थिति की जांच के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अवैध खनन में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं।
पुलिस-CISF की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
राजा कोलियरी की घटना ने पुलिस, CISF और ईसीएल प्रबंधन की संयुक्त निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खदान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि अवैध खनन के लिए स्थायी स्वरूप के मुहाने तैयार हो जाएं और वहां मशीनरी तथा बिजली के केबल तक पहुंच जाएं, तो नियमित गश्ती और सुरक्षा जांच की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि खदान के अंदर कथित अवैध खनन का यह नेटवर्क किसके संरक्षण या लापरवाही के बीच संचालित हो रहा था? क्या संबंधित सुरक्षा एजेंसियों और प्रबंधन को इसकी जानकारी थी या फिर निगरानी व्यवस्था में कहीं बड़ी चूक हुई?
कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी
अवैध मुहानों को भर देना और उपकरण जब्त कर लेना तत्काल कार्रवाई का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके साथ पूरे मामले की तह तक जाना भी जरूरी है। यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि अवैध खनन कब से चल रहा था, कितनी मात्रा में कोयला निकाला गया, बिजली की व्यवस्था कहां से हुई और खदान के अंदर मशीनरी व अन्य उपकरण किस माध्यम से पहुंचाए गए।
राजा कोलियरी का मामला अब सिर्फ अवैध खनन रोकने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही का भी सवाल बन गया है। विधायक के खदान के अंदर पहुंचने के बाद कथित अवैध गतिविधियां सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों और ईसीएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों का जवाब अब संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से अपेक्षित है।
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