- गोला के नया सिरका में देर रात मचा हड़कंप, जेसीबी से रास्ता बनाकर रेस्क्यू
- 44 हाथियों का झुंड क्षेत्र में सक्रिय, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील
- अब जरूरत ऐसी रणनीति की है, जिसमें जंगल के हाथी भी सुरक्षित रहें और जंगल की सीमा से सटे गांवों में रहने वाला इंसान भी खुद को सुरक्षित महसूस करे
रामगढ़ (गोला) :गोला वन क्षेत्र के हुप्पू पंचायत अंतर्गत नया सिरका गांव में देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो जंगली हाथी एक कुएं में गिर गए। सूचना मिलते ही रामगढ़ जिला वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद दोनों हाथियों को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाल लिया। बाहर निकलने के बाद दोनों हाथी जंगल की ओर चले गए।
रात 1.30 बजे कुएं में गिरे हाथी, वन विभाग ने संभाला मोर्चा
बताया गया कि घटना रात करीब 1:30 बजे की है। ग्रामीणों को मंसू महतो के कुएं में दो हाथियों के गिरने की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही वनकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। कुएं तक रेस्क्यू टीम और मशीनरी पहुंचाने के लिए जेसीबी की मदद से रास्ता तैयार किया गया। इसके बाद लगातार प्रयास करते हुए दोनों हाथियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
रेस्क्यू अभियान में वनरक्षी दीपक सिन्हा, मनीष शर्मा, योगेंद्र कुमार, दीपक कुमार दास और निलेश पोद्दार समेत वन विभाग के कई कर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
हाथियों की जान बचाने में वन विभाग की तत्परता सराहनीय
दोनों हाथियों के कुएं में गिरने की सूचना पर वन विभाग की टीम का तत्काल घटनास्थल पर पहुंचना और करीब दो घंटे तक लगातार अभियान चलाकर हाथियों को सुरक्षित निकालना निश्चित रूप से सराहनीय है। समय पर कार्रवाई नहीं होती तो दोनों हाथियों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी। रेस्क्यू टीम की तत्परता और साहस से एक बड़ी घटना टल गई।
गोला में 44 हाथियों का झुंड, कई नन्हे हाथी भी शामिल
रामगढ़ जिला वन विभाग के अनुसार फिलहाल गोला प्रखंड में करीब 44 जंगली हाथियों का झुंड सक्रिय है। इनमें कई छोटे हाथी भी शामिल हैं। विभाग की जानकारी के मुताबिक खोखा में करीब 32 और मुरुबंदा में करीब 12 हाथी जमे हुए हैं।
वहीं रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज, मुरुबंदा के पीछे करीब 12-13 हाथियों का झुंड भी फिलहाल मौजूद है। रात में झुंड को वहां से हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन हाथियों ने अपना स्थान नहीं छोड़ा।
वन विभाग की अपील—हाथियों के करीब न जाएं, फोटो-वीडियो बनाने की कोशिश न करें
वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों और आम नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि लोग हाथियों के झुंड के करीब जाकर फोटो या वीडियो न बनाएं, झुंड को घेरें या किसी भी तरह से परेशान न करें। रात और तड़के सुबह के समय झाड़ियों तथा हाथियों के संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों से विशेष रूप से दूर रहने की सलाह दी गई है।
एक तरफ हाथियों का रेस्क्यू, दूसरी तरफ ग्रामीणों की जिंदगी पर मंडरा रहा खतरा
हालांकि कुएं में गिरे हाथियों को सुरक्षित निकालने में वन विभाग की तत्परता की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जंगल से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंच रहे हाथियों से ग्रामीणों की सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी?
रामगढ़ जिले में लगातार मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाथियों के हमले में गरीब ग्रामीणों और किसानों की जान जा रही है, घर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और हजारों एकड़ में लगी फसलें नष्ट होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में केवल हाथियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर खदेड़ना ही पर्याप्त नहीं है।
ग्रामीण पूछ रहे सवाल—कब बनेगी स्थायी रणनीति?
एक ओर वन विभाग हाथियों के रेस्क्यू में तत्परता दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का सवाल है कि मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति कब जमीन पर उतरेगी? हाथियों के लगातार गांवों की ओर आने के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। विशेषकर रात के समय खेतों और जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले परिवारों को अपनी जान-माल की चिंता सताती रहती है।
एक दिन पहले दो महिलाओं की मौत, 13 अगस्त को भी गई थी एक महिला की जान
हाथियों के आतंक की गंभीरता का अंदाजा हाल की घटनाओं से लगाया जा सकता है। चितरपुर क्षेत्र में हाथियों के झुंड के हमले में दो महिलाओं की मौत की घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया। इससे पहले 13 अगस्त को कोरांबे पंचायत के गुंदलीखरैय टोला में हाथियों के हमले में सिल्ली क्षेत्र के सेहदा निवासी बालो देवी की मौत हो गई थी।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बीच ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग हाथियों की गतिविधियों की 24 घंटे प्रभावी निगरानी, संवेदनशील गांवों में तत्काल चेतावनी व्यवस्था, ग्रामीणों को समय पर सूचना और हाथियों के सुरक्षित कॉरिडोर की पहचान जैसे उपायों को और मजबूत करे।
हाथी भी सुरक्षित, इंसान भी सुरक्षित—यही हो वन विभाग की असली चुनौती
कुएं में गिरे हाथियों को बचाकर वन विभाग ने सराहनीय कार्य किया है, लेकिन अब चुनौती इससे कहीं बड़ी है—हाथियों और इंसानों दोनों की जान बचाना। हाथियों को सुरक्षित रखना जरूरी है, लेकिन उनके हमले में ग्रामीणों की जान न जाए, किसानों की मेहनत न उजड़े और गरीब परिवारों के घर न टूटें, इसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
अब जरूरत ऐसी रणनीति की है, जिसमें जंगल के हाथी भी सुरक्षित रहें और जंगल की सीमा से सटे गांवों में रहने वाला इंसान भी खुद को सुरक्षित महसूस करे।
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