- सड़क हादसों में बिना स्वार्थ पहुंचाया अस्पताल, तीन अलग-अलग मौकों पर बचाई अनजान लोगों की जिंदगी; ‘गुड सेमेरिटन’ के रूप में मिला प्रशस्ति-पत्र
गया जी । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश करने वाले डॉ. रामानुज महाराज को सम्मानित किया गया है। बिहार सरकार के कृषि मंत्री सह गयाजी के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उन्हें सड़क दुर्घटना में घायलों की निस्वार्थ सहायता करने और समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए ‘गुड सेमेरिटन’ के रूप में प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया है।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उस मानवीय संवेदना का सम्मान है, जो सड़क पर घायल किसी अनजान व्यक्ति को देखकर उसे बचाने के लिए आगे बढ़ती है।
कई बार निभाया इंसानियत का फर्ज
जिला प्रशासन एवं जिला सड़क सुरक्षा समिति, गया की ओर से जारी प्रशस्ति-पत्र के अनुसार डॉ. रामानुज महाराज ने 31 मई 2021, 28 सितंबर 2025 और 29 जुलाई 2026 को सड़क दुर्घटनाओं में घायल अज्ञात व्यक्तियों की बिना किसी स्वार्थ के सहायता की है। उन्होंने दुर्घटना पीड़ितों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रशस्ति-पत्र में उनके इस कार्य को ईमानदारी, करुणा और सेवा-भाव का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया है। जिला प्रशासन ने उनके निस्वार्थ योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘Good Samaritan’ के रूप में सम्मानित किया है।
‘घायल को अस्पताल पहुंचाना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी’
सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद करने से कई लोग कानूनी प्रक्रिया या पुलिस कार्रवाई के डर से पीछे हट जाते हैं। ऐसे समय में भोजपुर जिले के तरारी थाना अंतर्गत आने वाला गांव खरौना के डॉ. रामानुज महाराज ने न केवल संवेदनशीलता दिखाई, बल्कि मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का जिम्मा भी उठाया है।
उनके इस कार्य ने यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में कुछ मिनट की मदद किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है।
सम्मान ने बढ़ाया सेवा का हौसला
स्वतंत्रता दिवस के मंच से मिला यह सम्मान डॉ. रामानुज महाराज के लिए सेवा-कार्य की एक बड़ी पहचान बन गया है। सम्मान समारोह के दौरान मौजूद लोगों ने भी उनके मानवीय कार्य की सराहना की है।
प्रशस्ति-पत्र पर जिला परिवहन पदाधिकारी-सह-सचिव, जिला सड़क सुरक्षा समिति, गया तथा जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला सड़क सुरक्षा समिति, गया के हस्ताक्षर हैं।
एक मिसाल, जो समाज को दे रही बड़ा संदेश
डॉ. रामानुज महाराज का सम्मान समाज के लिए भी एक प्रेरक संदेश है—सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मदद करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।
“राष्ट्र की सेवा सीमा पर खड़ा सैनिक ही नहीं करता, सड़क पर किसी अनजान की जिंदगी बचाने वाला हर संवेदनशील नागरिक भी राष्ट्रसेवा करता है।”
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