- कोयला तस्करों पर कार्रवाई या सिर्फ माल की जब्ती? बड़े सिंडिकेट तक कब पहुंचेगा कानून का हाथ
- 280.76 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त कार्रवाई के बावजूद तस्करी का सिंडिकेट बेखौफ
- सेंधमारी के बाद भी जारी है काले कारोबार का खेल, ‘किंगपिन’ पर कार्रवाई नहीं होने से उठ रहे सवाल
हजारीबाग: हजारीबाग जिले में अवैध कोयला खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बावजूद जिले के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में अवैध कोयले के कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। हालिया कार्रवाई में सीआईएसएफ की एनटीपीसी-सीएमपीपी हजारीबाग इकाई ने बड़ी मात्रा में अवैध रूप से भंडारित कोयला जब्त कर तस्करी के नेटवर्क को एक बार फिर बड़ा झटका दिया है। लेकिन सवाल यह है कि बार-बार कोयला जब्त होने और वाहनों के पकड़े जाने के बावजूद आखिर इस अवैध कारोबार का पूरा नेटवर्क क्यों नहीं टूट रहा है?
सेंधवा के सुरंग वन क्षेत्र और मोइत्रा घाटी में बड़ी कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 सितंबर की शाम से 19 सितंबर की सुबह तक सीआईएसएफ की विशेष टीम ने सेंधवा के सुरंग वन क्षेत्र तथा मोइत्रा घाटी में विशेष अभियान चलाया। अभियान का नेतृत्व वरिष्ठ कमांडेंट विवेक शर्मा के निर्देशन तथा सहायक कमांडेंट संजीव कुमार मीणा की मौजूदगी में किया गया। इसके लिए बल के करीब 100 जवानों को अलग-अलग टीमों में लगाया गया था।
कार्रवाई करीब शाम छह बजे शुरू हुई और 19 सितंबर की सुबह करीब पांच बजे तक चली। सीआईएसएफ की टीमों ने लगभग 50 किलोमीटर दूर सेंधवा के वन क्षेत्र तथा करीब 20 किलोमीटर दूर मोइत्रा घाटी में एक साथ कार्रवाई की। दोनों स्थानों से जब्त किए गए कोयले को कुल 10 हाइवा वाहनों के माध्यम से एनटीपीसी कांटा घर तक पहुंचाया गया।
वजन कराने के बाद जब्त कोयले की कुल मात्रा 280.76 मीट्रिक टन बताई गई है। कार्रवाई के दौरान सीआईएसएफ टीम को उस समय स्थानीय स्तर पर विरोध का भी सामना करना पड़ा, जब कुछ लोगों ने ग्रामीणों की भीड़ जुटाकर कार्रवाई में बाधा डालने तथा कोयले के परिवहन को रोकने का प्रयास किया। बल के जवानों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए लोगों को समझाया और मार्ग को खाली कराया।
एक तरफ जब्ती, दूसरी तरफ फिर सक्रिय हो जाता है नेटवर्क
सीआईएसएफ की लगातार कार्रवाई यह दिखाती है कि अवैध कोयला कारोबार का नेटवर्क इलाके में सक्रिय बीहै। जानकारों के अनुसार, कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए अवैध परिवहन पर अंकुश जरूर लगता है, लेकिन इसके बाद तस्करी का नेटवर्क फिर सक्रिय हो जाता है।
यही वजह है कि अब केवल अवैध कोयला जब्त करने या वाहनों को पकड़ने के बजाय उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की जरूरत महसूस की जा रही है, जो कथित तौर पर कोयले की खुदाई, भंडारण, परिवहन और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था संचालित करता है।
‘बड़े तस्करों’ तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही?
स्थानीय स्तर पर चर्चा का सबसे बड़ा विषय यही है कि लगातार भारी मात्रा में कोयला पकड़े जाने के बावजूद इस अवैध कारोबार से जुड़े कथित बड़े खिलाड़ियों और सिंडिकेट संचालकों के खिलाफ अब तक कोई ऐसी बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे पूरे नेटवर्क पर प्रभावी चोट पड़ सके।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि जब तक केवल मौके से कोयला और वाहन जब्त होते रहेंगे तथा अवैध कारोबार के पीछे काम करने वाले कथित संचालकों तक जांच नहीं पहुंचेगी, तब तक तस्करी पर स्थायी रोक लगाना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि कार्रवाई का दायरा कोयला जब्ती से आगे बढ़ाकर पूरे नेटवर्क की पहचान और उसकी आर्थिक कड़ी तक पहुंचने तक ले जाने की जरूरत है।
पुलिस-वन विभाग के संरक्षण के आरोप, जांच से ही साफ होगी तस्वीर
इस बीच, कुछ स्थानीय सूत्रों और जानकारों की ओर से पुलिस तथा वन विभाग के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों पर कथित संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन दावों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि अवैध कोयला कारोबार केवल राजस्व की क्षति का मामला नहीं है, बल्कि इससे वन क्षेत्र, पर्यावरण और सरकारी संपदा पर भी सीधा असर पड़ता है। ऐसे में जिम्मेदारी केवल अवैध कोयला उठाने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच की आवश्यकता है।
सीआईएसएफ और तस्करों के बीच ‘चूहा-बिल्ली’ का खेल कब तक?
हजारीबाग के कोयला क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति को देखें तो एक तरफ सीआईएसएफ की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं, कोयला जब्त कर रही हैं और अवैध परिवहन को रोक रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कार्रवाई के बाद तस्करी का नेटवर्क किसी न किसी रूप में दोबारा सक्रिय होता दिखाई देता है।
इसी कारण स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सीआईएसएफ और अवैध कोयला कारोबारियों के बीच चल रहा यह ‘चूहा-बिल्ली’ का खेल कब तक चलेगा?
जरूरत अब केवल 280.76 मीट्रिक टन कोयला जब्त करने या 10 हाइवा पकड़ने तक सीमित कार्रवाई की नहीं, बल्कि इस बात की तह तक जाने की है कि यह कोयला आया कहां से, किसने भंडारित किया, किसके इशारे पर परिवहन की व्यवस्था हुई और इसके पीछे आर्थिक रूप से कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
अगर जांच एजेंसियां कथित सिंडिकेट के मुख्य संचालकों और पूरे नेटवर्क की आर्थिक कड़ी तक पहुंचने में सफल होती हैं, तभी हजारीबाग में अवैध कोयला कारोबार पर स्थायी लगाम लगाने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं।
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