हम खुद ऑफिस जाकर देखेंगे NTA का सिस्टम’: NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक

Live News 24x7
7 Min Read

देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट (NEET-UG) में कथित पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर जारी कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अत्यंत कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने न केवल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की संपूर्ण कार्यप्रणाली को जड़ से बदलने और उसे एक स्थायी संस्थागत स्वरूप देने का आदेश दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि पीठ के दोनों न्यायाधीश खुद एनटीए के अपग्रेडेड दफ्तर का जमीनी दौरा कर नई व्यवस्थाओं की वास्तविकता परखेंगे। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की विशेष पीठ ने केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद यह साफ कर दिया कि भविष्य में लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ रोकने के लिए तदर्थ व्यवस्थाओं के बजाय एक फूलप्रूफ, स्थायी और पारदर्शी तंत्र खड़ा करना ही एकमात्र विकल्प है।

माह के अंत तक आएगी नंदन नीलेकणि पैनल की अंतरिम रिपोर्ट: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी जानकारी

शुक्रवार को हुई महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को अवगत कराया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में संरचनात्मक सुधारों की रूपरेखा तय करने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त नंदन नीलेकणि समिति ने अपनी सभी व्यापक चर्चाएं पूरी कर ली हैं। उन्होंने शीर्ष अदालत को विश्वास दिलाया कि यह उच्चस्तरीय विशेषज्ञ पैनल इसी माह के अंत तक अपनी पहली विस्तृत अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाले इस पैनल ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पूर्व समिति के वरिष्ठ सदस्यों के साथ भी गहन विचार-विमर्श किया है, ताकि तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों का एक साझा एवं प्रभावी रोडमैप धरातल पर उतारा जा सके।

DoPT के संयुक्त सचिव को हलफनामा दाखिल करने का कड़ा आदेश: अब तक के सभी कदमों का मांगा ब्योरा

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के उस संयुक्त सचिव को औपचारिक हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है, जो नीलेकणि पैनल को प्रशासनिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। पीठ ने निर्देश दिया कि इस शपथपत्र में यह स्पष्ट और बिंदुवार तरीके से दर्ज होना चाहिए कि परीक्षा संचालन तंत्र को सुरक्षित बनाने और दोनों समितियों की सिफारिशों के आधार पर अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जा चुके हैं। अदालत ने साफ किया कि केवल कमेटियों के गठन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर हुए वास्तविक बदलावों का दस्तावेजी प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

‘अस्थायी व्यवस्थाएं बंद करें, स्थायी ढांचा ही मूल कुंजी’: पीठ ने प्रतिनियुक्ति कल्चर पर उठाए सवाल

परीक्षा प्रणाली में बुनियादी कमजोरियों की ओर इशारा करते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि केंद्र सरकार का संपूर्ण ध्यान नीट परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया को पूरी तरह संस्थागत बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। पीठ ने दो-टूक शब्दों में कहा कि पूरी व्यवस्था का स्थायी होना ही इस गंभीर समस्या की मूल कुंजी है। अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए में एक स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर सेटअप, पूर्णकालिक स्थायी कर्मचारी और सुव्यवस्थित स्वतंत्र वर्टिकल्स होने चाहिए। पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए रेखांकित किया कि परीक्षा जैसी अत्यधिक संवेदनशील प्रक्रियाओं में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आने वाले कर्मचारियों की संख्या नगण्य होनी चाहिए, क्योंकि जब तक स्थायी और जवाबदेह मानव संसाधन नहीं होंगे, तब तक एक मजबूत और अभेद्य सुरक्षा ढांचा खड़ा नहीं हो सकता।

NTA के नए अपग्रेडेड दफ्तर का व्यक्तिगत दौरा करेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज

सुनवाई के दौरान उस वक्त एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली जब जस्टिस नरसिम्हा ने पीठ की मंशा जाहिर करते हुए कहा कि वह और जस्टिस अराधे दोनों खुद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की नई और आधुनिक तकनीक से लैस फैसिलिटी का व्यक्तिगत रूप से दौरा करना चाहते हैं। पीठ ने कहा कि वे सीधे दफ्तर जाकर अपनी आंखों से देखना चाहते हैं कि पेपर तैयार करने, डिजिटल लॉकिंग, डेटा ट्रांसमिशन और परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए एजेंसी ने वास्तव में क्या सिस्टम तैयार किया है। इस पर शिक्षा मंत्रालय की ओर से अदालत को बताया गया कि एक नया अपग्रेडेड सिस्टम तैयार कर लिया गया है। वहीं सॉलिसिटर जनरल मेहता ने पीठ को आश्वस्त किया कि नए ढांचे की कार्यप्रणाली को स्थायी बनाना सुनिश्चित किया गया है, हालांकि वर्तमान में मानव संसाधनों की उपलब्धता केवल आंशिक रूप से ही पूरी हो सकी है जिसे जल्द पूर्ण कर लिया जाएगा।

FAIMA की याचिका और 19 अगस्त के निर्देशों की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे द्वारा दायर याचिका समेत विभिन्न छात्र संगठनों और डॉक्टरों की याचिकाओं के एक संयुक्त बैच पर विस्तृत सुनवाई कर रहा है। इससे पूर्व, 19 अगस्त को भी शीर्ष अदालत ने एनटीए में आमूलचूल सुधारों को संस्थागत रूप देने की तात्कालिक आवश्यकता पर बल दिया था और केंद्र को राधाकृष्णन पैनल व नीलेकणि समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन की प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। देश भर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के इस प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और आगामी अंतरिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की उम्मीद जगी है।

15
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *