पश्चिम बंगाल के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्य फोकस राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य पंजाब पर टिक गया है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। चर्चा है कि बीजेपी अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ मिलकर दोबारा चुनावी मैदान में उतर सकती है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच अंदरखाने बातचीत का दौर जारी है, जिससे राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन अमलीजामा पहनता है, तो पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिल सकता है।
कृषि कानूनों के बाद आई थी दूरियां
गौरतलब है कि अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन करीब ढाई दशक पुराना रहा है। दोनों दलों ने मिलकर लंबे समय तक पंजाब में सरकार चलाई थी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में साल 2020 में अकाली दल ने एनडीए (NDA) गठबंधन से नाता तोड़ लिया था। उस दौरान उपजे किसान आंदोलन और राजनीतिक तनाव के बाद दोनों दल अलग-अलग हो गए थे। समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और हालिया मुलाकातों ने दोनों दलों के पुराने रिश्तों को फिर से जोडने की संभावनाओं को हवा दे दी है।
नेताओं के बयानों से मिल रहे बड़े संकेत
हाल ही में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद से ही गठबंधन की चर्चाएं जोर पकड़ चुकी हैं। इसके अलावा, पार्टी नेताओं के सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे बयानों ने इन अटकलों को और मजबूत कर दिया है। दोनों ही दलों के नेता भले ही आधिकारिक तौर पर अभी खुलकर कुछ बोलने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि राज्य में विपक्षी दलों के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए पुराना गठबंधन फिर से आकार ले सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर दोनों दल किस फॉर्मूले पर सहमति बनाते हैं।
24