सनातन धर्म में सावन के महीने का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है, क्योंकि यह पूरा महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस पवित्र मास में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। पंचांग के अनुसार सावन का महीना अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है और इसी के साथ सावन मास का अंतिम यानी चौथा सोमवार बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का हर एक सोमवार अपने आप में अत्यंत शक्तिशाली होता है, लेकिन जब यह अंतिम सोमवार होता है तो इसका महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है। इस बार सावन के चौथे और आखिरी सोमवार पर एक साथ पांच बेहद दुर्लभ और शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है, जो शिव भक्तों के लिए साधना, आराधना और रुद्राभिषेक करने का एक स्वर्णिम अवसर प्रदान कर रहा है। आइए इस विशेष लेख में विस्तार से जानते हैं सावन के अंतिम सोमवार की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, बनने वाले योग और रुद्राभिषेक के नियमों के बारे में।
सावन के चौथे और अंतिम सोमवार की सही तिथि
वैदिक पंचांग की गणना के मुताबिक, इस वर्ष सावन मास का अंतिम और चौथा सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार सावन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 24 अगस्त को पूरे दिन और रात तक व्याप्त रहेगी। इस दिन चंद्रमा का संचरण मकर राशि में रहेगा और साथ ही कई अद्भुत योगों का मिलन देखने को मिलेगा। चूंकि सावन का यह अंतिम सोमवार है, इसलिए देश भर के प्रसिद्ध शिव मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर, बैद्यनाथ धाम और स्थानीय शिवालयों में शिव भक्तों की भारी भीड़ जुटने की पूरी संभावना है। इस दिन श्रद्धालु सुबह से ही कतारों में लगकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करेंगे। जो भक्त पूरे सावन के दौरान नियमित रूप से व्रत नहीं रख पाए हैं, वे इस अंतिम सोमवार का व्रत रखकर सावन मास की संपूर्ण पूजा का पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं।
बन रहे हैं 5 अद्भुत और मंगलकारी शुभ संयोग
इस बार सावन के आखिरी सोमवार पर एक-दो नहीं बल्कि कुल पांच अद्भुत और दुर्लभ शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं, जो इस दिन के महत्व को और अधिक बढ़ा देते हैं। सबसे पहला संयोग यह है कि इस दिन स्वयं कैलाश पर शिववास रहेगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र में रुद्राभिषेक के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। इसके अलावा दूसरा बड़ा संयोग सर्वार्थ सिद्धि योग का बन रहा है, जिसमें किया गया कोई भी कार्य और पूजा हमेशा सफल होती है। तीसरा संयोग त्रिपुष्कर योग का है, जो कार्यों में त्रिगुणा फल प्रदान करता है। चौथा संयोग सुकर्मा और पांचवां रवि योग का अद्भुत संगम है, जो जीवन से सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करके मान-सम्मान और सुख-समृद्धि में वृद्धि करता है। इन पांच महायोगों के एक साथ मिलने से इस सोमवार की गई शिव आराधना का कई गुना अधिक फल प्राप्त होगा, जिससे साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और सभी अटके हुए कार्य तेजी से पूरे होने लगेंगे।
रुद्राभिषेक के लिए मिल रहा है खास और उत्तम मुहूर्त
सावन के सोमवार के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का विशेष विधान है। पंचांग के अनुसार 24 अगस्त 2026 को सावन के चौथे सोमवार पर रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ के लिए कई अत्यंत शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त 04:28 बजे से 05:12 बजे तक रहेगा, जो भगवान के ध्यान और साधना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इसके बाद सुबह 07:30 बजे से लेकर दोपहर 12:25 बजे के बीच चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया मुहूर्त में आप किसी भी समय देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक कर सकते हैं। इसके अलावा दिन का सबसे महत्वपूर्ण अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा, जिसमें की गई पूजा बेहद फलदायी होती है। यदि आप प्रदोष काल में पूजा करना चाहते हैं, तो शाम को 06:52 बजे से रात 09:05 बजे तक का समय बहुत ही पावन रहेगा। इन निर्धारित मुहूर्तों में गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर और गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करना अत्यंत कल्याणकारी रहेगा।
सावन के अंतिम सोमवार की सरल और सटीक पूजा विधि
सावन के अंतिम सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र, विशेषकर सफेद या पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने घर के मंदिर या किसी नजदीकी शिव मंदिर में जाकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। मंदिर में पहुंचकर सबसे पहले भगवान गणेश और माता पार्वती का स्मरण करें, क्योंकि इनके बिना शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके बाद शिवलिंग पर पवित्र गंगाजल अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से पंचामृत स्नान कराएं। अभिषेक के बाद भगवान को चंदन का लेप लगाएं, भांग, धतूरा, बेलपत्र, सफेद आंकड़े के फूल, अक्षत और जनेऊ अर्पित करें। पूजा के दौरान शिव चालीसा का पाठ करें और सावन सोमवार की व्रत कथा अवश्य सुनें। अंत में धूप, दीप और कपूर से आरती करके भगवान शिव को अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हुए परिवार की सुख-शान्ति और आरोग्यता के लिए प्रार्थना करें।
सावन के आखिरी सोमवार व्रत का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
सावन के महीने में आने वाले सोमवार का व्रत कुंवारी कन्याओं द्वारा मनचाहा वर पाने के लिए और सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। इसके अलावा जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है या मानसिक तनाव, डिप्रेशन, और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं, उनके लिए सावन का यह अंतिम सोमवार किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से शिवोपासना करने से शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के बुरे प्रभावों से भी राहत मिलती है। महादेव अपने भक्तों के थोड़े से जल और बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए इस अंतिम सोमवार को सच्चे मन से की गई आराधना व्यक्ति के जीवन के सारे संकटों को चुटकियों में दूर कर देती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
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