वैशाली : मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना वैशाली जिले के जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत जिले ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 183 बाल हृदय रोगियों की सफल सर्जरी कराकर उन्हें नया जीवन दिया है। इसके साथ ही, वैशाली जिला सर्वाधिक सर्जरी कराने के मामले में प्रदेश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
इसी क्रम में योजना के 103वें बैच के तहत जिले के 3 बच्चों को जन्मजात हृदय रोग के इलाज के लिए शनिवार को श्री सत्य साईं हृदय अस्पताल, अहमदाबाद रवाना किया गया।
जिला स्वास्थ्य समिति, वैशाली से इन बच्चों को 102 एम्बुलेंस के जरिए पहले राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना भेजा गया, जहां से विमान द्वारा उन्हें अहमदाबाद रवाना किया गया। बच्चों को विदाई देने के दौरान डीईआईसी प्रबंधक-सह-समन्वयक आरबीएसके डॉ. शाइस्ता, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निभा रानी सिन्हा, आरबीएसके चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार सौरभ और डाटा ऑपरेटर श्रवण कुमार मौजूद रहे।
निःशुल्क हो रहा है पूरा इलाज:
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और जिला स्वास्थ्य समिति के साझा प्रयासों से बच्चों की पहचान से लेकर उनके उपचार तक की सारी प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क संचालित की जाती है। इसमें बच्चों और उनके परिजनों के आने-जाने के किराए से लेकर जांच और ऑपरेशन तक का पूरा खर्च सरकार वहन करती है।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री सात निश्चय-2 के तहत यह योजना गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की बड़ी किरण है। सिविल सर्जन ने कहा कि सरकार आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। आरबीएसके के तहत हृदय रोग के अलावा कटे होंठ, तालु, जन्मजात विकलांगता और अन्य गंभीर बीमारियों का भी मुफ्त इलाज किया जाता है।
डीपीएम डॉ. कुमार मनोज और डीसी-आरबीएसके डॉ. शाइस्ता ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि किसी बच्चे में जन्मजात हृदय रोग या अन्य गंभीर लक्षण दिखें, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आरबीएसके टीम से संपर्क करें, ताकि समय रहते बच्चों को उचित उपचार मिल सके।
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