* क्या पूर्व के स्थापना डीपीओ पुनः बनेंगे इसके अभियुक्त, *नियोजन इकाई और स्थापना शाखा भी सदेह के घेरे में, *डीईओ ने शुरू किया कार्रवाई, डीपीओ सहित चार से किया जबाबा तलब, टीम गठित
Live News 24×7 के लिए कैलाश गुप्ता।
मोतिहारी। गत शनिवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय परिसर में शिक्षिका पति अरविंद कुमार अधिवक्ता की हुई मौत क्या नई मोड़ लेने वाली है। सीसीटीवी कैमरे की तीसरी आँख ने जहां वर्तमान अधिकारियों को राहत दी है वहीं पूर्व के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना, संबंधित कार्यालय कर्मी, शिक्षिका के नियोजन इकाई और विद्यालय प्रधान कटघरे में नजर आ रहें है।
इस मामले में जहां शिक्षकों व शिक्षकों के संघों के प्रतिनिधियों द्वारा अलग अलग चर्चाएं हो रही तो वहीं जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र देव का कहना है कि यदि ससमय वेतन मिलता रहता तो शिक्षिका पति अरविंद कुमार अधिवक्ता आर्थिक तनाव में नहीं रहते, आर्थिक तनाव के कारण ही उनकी मौत हुई है। उनके मौत का मुख्य कारण आर्थिक तनाव है जो शिक्षा विभाग के अधिकारियों- कर्मचारियों के द्वारा उत्तपन्न हुआ है। उनके मौत के दोषी शिक्षा विभाग के वे सभी लोग है जो वेतन भुगतान से संबंधित है। इनसभी लोंगो पर गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है।
गौरतलब हो कि कार्यलय सूत्रों के अनुसार शिक्षिका श्रीमती रश्मि स्वराज का नियोजन वर्ष 2005 में हरसिद्धि नियोजन इकाई द्वारा नियोजित शिक्षिका के रूप में हुआ था। किसी कारणवश इनके द्वारा सर्विस कंटिन्यू नहीं किया गया था परंतु कुछ दिनों बाद जिला शिक्षा प्राधिकार में अपील किया गया जिसमें प्राधिकार द्वारा दिये गए अदेशोंप्रान्त इनकी सेवा वर्ष 2021 में पुनः प्रारम्भ हुई परन्तु कागजी त्रुटियों के कारण वेतन चालू नहीं हो सका।
बताया जाता है कि वर्ष 2025 के अप्रैल से जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना साहेब आलम के द्वारा इनका वेतन प्रारम्भ किया गया परन्तु बकाया वेतन के लिए न तो नियोजन इकाई, विद्यालय प्रधान द्वारा समुचित कदम उठाया गया और ना हीं जिला स्थापना शाखा द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई की गई। ससमय समुचित कार्रवाई नहीं होने के कारण शिक्षिका श्रीमती स्वराज का बकाया वेतन भुगतान नहीं हुआ।
वहीं बताया जाता है कि स्थापना शाखा के एक कर्मी द्वारा पांच हजार का नजराना वसूलने के बावजूद लगभग एक वर्षों से यूएन नंबर जारी करने के लिए दौड़ाया जाता रहा। उसी क्रम में गत दिनांक 11 जुलाई शनिवार को शिक्षिका श्रीमती स्वराज के पति की मौत कार्यालय परिसर में हार्ड अटैक से हो गई। जिसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं की जाने लगी, जिसमें कार्यलय के अंदर शिक्षिका पति के साथ कार्यालयकर्मियों द्वारा मारपीट करने की बात भी की गई परन्तु
जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी के द्वारा जारी सीसीटीवी कथित तीसरी आँख की वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षिका पति कार्यालय के अंदर गए ही नहीं थे, वे अपनी बाईक के पास खड़े रहे जहां वे गिरे और उनकी मौत हॉस्पिटल जाने के क्रम में हो गई।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र देव की माने तो इनके अनुसार बकाया वेतन का भुगतान नहीं होने और आर्थिक तनाव के कारण ही शिक्षिका पति अधिवक्ता की मौत हुई है जिसमें जिला स्थापना के पूर्व पदाधिकारी और संबंधित कर्मी तथा विद्यालय प्रधान व नियोजन इकाई के सभी अधिकारी दोषी है जिनके विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का मुकदमा बनता है।
वहीं उक्त घटना के उपरांत जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कहा है कि बकाया वेतन भुगतान मामले में दोषी जो भी होंगे उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने वेतन भुगतान पर कहा कि सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है कल 12 बजे दिन तक उनका बकाया वेतन उनके खाते में चला जाएगा।
वहीं उन्होंने बताया कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना सहित प्रधान सहायक अमित कुमार सिंह, शिवनाथ विद्यार्थी और अभिषेक कुमार के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जांच टीम गठित कर दिया गया है और शेष पर शीघ्र ही करवाई प्रारम्भ कर दी जाएगी।
बहराल यह कयास लागये जाने लगा है कि क्या पुनः एक बार फिर स्थापना शाखा के पूर्व अधिकारी पर गैर इरादतन हत्या का आरोप लगेगा, क्योकिं उनके विरुद्ध वर्ष 2024 में भी एक मृत शिक्षक के भाई द्वारा आरोप लगाया जा चुका है।
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