कब तक सरकारें स्वतंत्रता सेनानी और शहीद परिवारों की करेंगी उपेक्षा- जितेन्द्र रघुवंशी

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स्वतंत्रता सेनानी -शहीद परिवारों के हितों की हर प्रकार रक्षा करेगी सरकार- राजेन्द्र शुक्ला*
रीवा, अशोक वर्मा। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति (रजि.) के तत्वावधान में संगठन की मध्यप्रदेश इकाई रीवा संभाग द्वारा कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में 1857 के अमर शहीदों के परिवारों को सम्मानित करते हुए स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवार सम्मेलन अपनी अमिट छाप छोड़ते हुए संपन्न हुआ। राष्ट्रीय कार्यक्रम हर महीने प्रथम रविवार 10:00 बजे 10 मिनट स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के नाम अभियान के अंतर्गत 10:00 बजे राष्ट्रीय ध्वजवंदन, राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। ध्वजारोहण संगठन की संरक्षक डॉ पद्मा पाण्डेय, डॉ ज्योति सिंह तथा राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने संयुक्त रूप से किया।
सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, सांसद जनार्दन प्रसाद मिश्र तथा राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया, तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान आयोजक मंडल के सदस्यों द्वारा शाॅल, संगठन का पटका ओढ़ाकर श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह भेंट करके किया गया। इस अवसर पर आजादी की प्रथम क्रांति 1857 के अमर शहीदों बाबा दलगंजन सिंह के वंशज मोहन सिंह, शहीद रणमत सिंह के वंशज चंद्र मोलेश्वर सिंह, शहीद केदारनाथ चतुर्वेदी के वंशज राम मूर्ति चतुर्वेदी, शहीद लाल पद्मधर सिंह के वंशज विक्रम सिंह, शहीद रणजीत राय दीक्षित के वंशज विमल राय दीक्षित, शहीद मनधीर पांडे के वंशज बाल गोविंद पांडे, शहीद रामाश्रय गौतम के वंशज चुन्नीलाल गौतम, शहीद बुद्ध प्रताप सिंह के वंशज अर्जुन सिंह तथा शहीद श्याम शाह के वंशज जय सिंह का सम्मान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तथा सांसद जनार्दन प्रसाद मिश्र ने किया।
कार्यक्रम संयोजक डा.राजा भइया मिश्र के स्वागत उद्बोधन के बाद स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों तथा अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम आभारी हैं माननीय प्रधानमंत्री जी के, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे संकल्प का लाल किले की प्राचीर से उद्घोष किया। माननीय अतिथियों को हम यहां पर यह जानकारी देना चाहेंगे कि केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त लगभग 173000 तथा लगभग इतने ही राज्य सरकारों द्वारा मान्यता प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं आजादी के पहले शहीद हुए लगभग 732780 क्रांतिकारियों ने अनेक यातनाएं सहकर भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया, उनके परिवारों की वर्तमान में कुल संख्या लगभग चार करोड़ होती है। इतने विशाल जन समुदाय की विभिन्न सरकारों द्वारा अब तक उपेक्षा ही होती रही है। रघुवंशी ने कहा कि हम याचक नहीं हैं, हम तो सरकार को उनके दायित्वों का बोध कराने का प्रयास कर रहे हैं। हम देशभक्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के वंशज हैं, हमारे अंदर भी उन्हीं क्रांतिकारियों का खून दौड़ रहा है जिन्होंने देश को आजाद कराकर रामराज्य की स्थापना के लिए राजतंत्र के प्रहरियों को सौंप दिया।
पिछले दिनों पराक्रम दिवस पर संस्कृति मंत्रालय के आमंत्रण पर अंडमान निकोबार की यात्रा का उल्लेख करते हुए रघुवंशी ने आग्रह किया कि एक बार सभी को सेल्यूलर जेल अवश्य देखना चाहिए, ताकि हमें यह एहसास हो सके कि देश की आजादी के लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी यातनाएं सही हैं। रघुवंशी ने असम सरकार के आमंत्रण पर शहीद कुशल कुंवर की 83 वीं पुण्यतिथि पर गुवाहाटी असम जाने की जानकारी देते हुए कहा कि असम के पराक्रमी मुख्यमंत्री माननीय श्री हेमंत विश्व शर्मा जी ने हमारे ही कार्यालय में विचार विमर्श के लिए 20 मिनट का समय दिया था किंतु उन्होंने दुगना समय दिया, उन्होंने हमसे पूछा कि आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने जो त्याग किया उनके हम ऋणी हैं और सदैव रहेंगे, उनके लिए हम बहुत कुछ कर भी रहे हैं, पर उत्तराधिकारियों ने आजादी के लिए क्या किया, जो आप उनके अधिकारों की बात कर रहे हैं। जिस परिवार का मुखिया जेल में हो, जंगल में दर दर की ठोकरें खा रहा हो, उनके परिवारों ने कैसी पीड़ा झेली, यह किसी को दिखाई नहीं दिया। आजादी के बाद 25 वर्ष तक किसी ने नहीं पूछा। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के आग्रह पर 1972 में ताम्रपत्र, भूमि, मकान, पेट्रोल पंप, सम्मान पेंशन, की व्यवस्था हुई। सम्मान स्वरूप दिए गए सभी संसाधन बच्चों के पास हैं, फिर सम्मान पेंशन वापस क्यों? जबकि प्रिवीपर्स बंद करके सम्मान पेंशन दिया गया था।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान तथा उनके परिवारों के अस्तित्व की रक्षा के लिए रघुवंशी ने आयोजक मंडल के साथ उपमुख्यमंत्री को अपना अधिकार पत्र सौंपा, जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों के निधन के बाद उनकी सम्मान पेंशन प्रथम पीढ़ी को उत्तराखंड तथा असम सरकार की भांति देने, राजकीय अतिथि गृहों में आवास की सुविधा तथा सचिवालय में प्रवेश की अनुमति जिलाधिकारी द्वारा प्रदत्त परिचय पत्र धारकों को प्रदान करने, असम, उत्तराखंड तथा पंजाब की भांति दूसरी तथा तीसरी पीढ़ी को भी जिलाधिकारी द्वारा परिचय पत्र देने तथा पूर्व में निर्धारित शिक्षा एवं नौकरी में 5% आरक्षण की सुविधा बहाल करने, रीवा, भोपाल सहित प्रत्येक जिले में असम सरकार की भांति शासकीय कार्य से आए सेनानी शहीद परिवारों को रुकने के लिए सेवा सदन का निर्माण करने, नगर निकायों से लेकर जहां भी मनोनयन की प्रक्रिया है उनमें स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के प्रतिनिधियों को भी मनोनीत करने तथा प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के नाम से संपर्क मार्गों तथा शासकीय विद्यालयों का नामकरण करके उनकी स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने और उनके जीवन परिचय को क्षेत्रवार माध्यमिक विद्यालयों तक पाठ्यक्रम में शामिल करने का उल्लेख किया गया है।
संबोधन के अंत में जितेन्द्र रघुवंशी ने सरकार द्वारा सार्थक पहल करने पर स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति एवं सभी सहयोगी संगठनों के सदस्यों को तिरंगे झंडे की साक्षी में सदैव सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का संकल्प दिलाया। मुख्य अतिथि राजेंद्र शुक्ल ने स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के प्रति कृतज्ञता का भाव दर्शाते हुए कहा कि हमारी सरकार स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के हितों की हर प्रकार से रक्षा करेगी।
सम्मेलन में आए स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों को संगठन सचिव कपूर सिंह दलाल, मध्यप्रदेश अध्यक्ष डॉ आलोक चंसोरिया, उत्तरप्रदेश के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, पंजाब प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह टिवाना, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मृगांक शेखर आनंद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गुजराती, डॉ. ज्योति सिंह, प्रसन्न सिंह परिहार, अरुण प्रताप सिंह, आदित्य प्रताप सिंह रघुवंशी, सुरेश चंद्र बबेले ने भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के विश्वनाथ सोनी, प्रताप सिंह बुन्देला, ममता पाण्डेय, हर्ष वर्धन सिंह, डॉ बी एल मिश्रा, सावित्री सिंह, छाया गुप्ता, अभय प्रताप सिंह, अजीत सिंह, हेमेन्द्र सिंह, उपस्थित थे।

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