Live News 24×7 के लिए कैलाश गुप्ता।
मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण। एम०जे०के० राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य लालबाबू साह की प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता का एक बड़ा और गंभीर दस्तावेज-आधारित खुलासा हुआ है। बताते चलें कि प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता वह स्थिति है जहाँ सरकारी अधिकारी या प्रशासक प्राप्त शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं और बिना किसी ठोस कारण या नियम के व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर कार्य करते हैं।
वहीं विभागीय नियमावली के अनुसार, किसी भी विद्यालय/कॉलेज के प्रधानाध्यपकों/ प्रभारी प्राचार्यों को अपना जिला या मुख्यालय छोड़ने से पहले अपने उच्चाधिकारी (जैसे DEO या क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक) से लिखित रूप में अनुमति लेना अनिवार्य है।
जबकि जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी के जांच में यह सनसनीखेज मामला सामने आया है कि एमजेके कन्या इंटर कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य लालबाबू साह जब भी पटना (जहां इनका परिवार रहता है) या समस्तीपुर, (जहां इनका पैतृक गांव है) जाते हैं तो इसके लिए उन्होंने कभी भी किसी उच्चाधिकारी से कोई अनुमति पत्र या स्वीकृति नहीं ली है।
श्री साह के द्वारा बिना किसी वैध विभागीय आदेश या अनुमति पत्र के अपने निजी दौरों को भी ‘ई-शिक्षा कोष’ ऐप पर ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ दिखाकर सरकारी उपस्थित में तब्दील कर दिया गया है जो इनकेमनमानी, अहंकारी व्यवहार और नियमों के खुला उल्लंघन का चरम सीमा को व्यक्त करता है।
इस बात का खुलासा तब हुआ जब जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा स्वयं समीक्षा किया गया तो चौकाने वाली यह बात सामने आया, जिसके आलोक में गत दिनों श्री साह से कारण पृच्छा करते हुए साक्ष्य की मांग की गई थी। श्री साह द्वारा दिए जबाब को आधारहीन व तथ्यहीन मानते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पुनः 24 घंटे का समय देते हुए श्री को अपने पत्र पत्रांक-1260 दिनांक 04.06.26 में कहा है कि आपका स्पष्टीकरण ‘त्रुटिपूर्ण एवं तथ्यहीन’ है पुनः अपने उपस्थिति की तिथिवार साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण 24 घँटे में उपलब्ध कराएं।
गौरतलब हो बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड की मुख्यालय क्षेत्रीय स्तर सभी प्रमंडलों में स्थापित हो चुकी है इसके बावजूद प्रभारी प्राचार्य लालबाबू साह के द्वारा बोर्ड में कार्य बताकर बार बार पटना जाना और विद्यालय के बजाय अन्यत्र मिलों दूर रहकर ई-शिक्षा कोष से मार्क ऑन डियूटी बताकर उपस्थिति दर्ज करना जहां अपने आप में हास्यपद है तो वहीं यह कृत्य इनके मनमानी और अहंकारी व्यवहार की चरम सीमा को व्यक्त करती है, वहीं कार्यालयीय स्तर पर करवाई में बिलम्ब होना भी कुछ और बयां करता है।
कार्यालय सहित शिक्षकों में यह चर्चा होने लगी है कि जब स्वयं जिला शिक्षा पदाधिकारी की समीक्षा में श्री साह के द्वारा ई-शिक्षा कोष का दुरुपयोग करने और जबाब में गुमराह करने जैसा अपराध को अंजाम देने की पुष्टि हो चुकी है इसके बावजूद किस परिस्थिति में पुनः स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। यह जहां विभागीय नियमों के अनुपालन और कार्यालयीय कार्यशैली पर एक गम्भीर सवालिया निशान खड़ा कर सकता है वहीं ऐसे कृत्य करने वाले शिक्षकों के मनोबल में बढ़ावा भी मिल सकता है।
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