बिहार की सियासत में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के जेल से बाहर आते ही पूरे टाल क्षेत्र (मोकामा-बड़हिया) में जश्न का सैलाब उमड़ पड़ा है। सोमवार (23 मार्च 2026) की शाम पटना की बेऊर जेल से रिहा होने के बाद, मंगलवार सुबह अनंत सिंह एक विशाल काफिले के साथ लखीसराय जिले के प्रसिद्ध बड़हिया महारानी स्थान (मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर) पहुँचे। पटना से बड़हिया तक के करीब 120 किलोमीटर लंबे सफर में उनके समर्थकों ने जगह-जगह भव्य स्वागत किया और “बड़हिया वाली महारानी की जय” तथा “छोटे सरकार जिंदाबाद” के नारों से आसमान गुंजा दिया।
1. ‘महारानी स्थान’ में मत्था टेककर शुरू की नई पारी
अनंत सिंह की आस्था बड़हिया की महारानी स्थान में अटूट मानी जाती है। जेल से निकलने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक और धार्मिक कार्यक्रम था।
पूजा-अर्चना: विधायक ने मंदिर में विशेष विधिवत पूजा की और माता का आशीर्वाद लिया। समर्थकों का मानना है कि ‘महारानी’ की कृपा से ही उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड में हाईकोर्ट से जमानत मिली है।
भक्ति और शक्ति: मंदिर परिसर में समर्थकों की इतनी भारी भीड़ थी कि पुलिस को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। अनंत सिंह ने हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन स्वीकार किया, लेकिन मीडिया से दूरी बनाए रखी।
2. पटना से बड़हिया: 50 कारों का काफिला और ‘लैंड क्रूजर’ का जलवा
अनंत सिंह अपनी सिग्नेचर ‘लैंड क्रूजर’ गाड़ी में सवार होकर निकले। उनके पीछे करीब 50 से अधिक लग्जरी गाड़ियों का काफिला चल रहा था।
स्वागत द्वार: बख्तियारपुर, बाढ़ और मोकामा में समर्थकों ने दर्जनों स्वागत द्वार बनाए थे। रास्ते भर समर्थकों ने उन पर गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश की।
भोज की तैयारी: विधायक के स्वागत में मोकामा और पटना स्थित आवास पर 15 हजार से अधिक लोगों के लिए विशेष भोज का आयोजन किया गया है, जिसमें 3 लाख रसगुल्ले और पारंपरिक पकवान बनवाए गए हैं।
3. “मुझे झूठा फंसाया गया था”: रिहाई पर पहला बयान
बेऊर जेल के गेट से बाहर निकलते ही अनंत सिंह ने अपने ठेठ अंदाज में मीडिया से संक्षिप्त बातचीत की। उन्होंने कहा, “हमको तो झूट्ठे फंसा दिया गया था। जिस वक्त घटना (दुलारचंद मर्डर) हुई, हम वहां से 4 किलोमीटर दूर थे। कानून पर हमको भरोसा था और आज इंसाफ हुआ है।”टाल क्षेत्र का सियासी समीकरण अनंत सिंह की रिहाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं हैं।
दबदबा: जेल में रहते हुए भी अनंत सिंह ने भारी मतों से चुनाव जीतकर यह साबित कर दिया कि मोकामा में उनका सिक्का आज भी चलता है।
भावी रणनीति: रिहाई के बाद यह रोड शो एक तरह का ‘शक्ति प्रदर्शन’ माना जा रहा है। चर्चा यह भी है कि अनंत सिंह अब अपने बड़े बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
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