सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा जनता का भरोसा, संस्थागत प्रसव के आंकड़ों में दर्ज की गई ऐतिहासिक वृद्धि

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  • सितंबर 2025 में संस्थागत प्रसव में देखी गयी सबसे बड़ी तेजी 
पटना। राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और मातृ-शिशु सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के अब सुखद परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं। हाल ही में जारी किए गए संस्थागत प्रसव  के तुलनात्मक आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर आम जनता का विश्वास पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष (2024-25 बनाम 2025-26) सरकारी सुविधाओं में होने वाले प्रसव की संख्या में जो निरंतर और उत्साहजनक बढ़ोतरी देखी गई है, वह राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
साल की दूसरी छमाही में दिखी रिकॉर्ड बढ़त
आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि साल की दूसरी छमाही में यह सकारात्मक बदलाव और भी व्यापक रहा है। अप्रैल और मई के शुरुआती महीनों के स्थिर रुझान के बाद, जुलाई से दिसंबर तक के आंकड़ों ने एक बड़ी छलांग लगाई है। जहाँ पिछले वर्ष जुलाई में प्रसव की संख्या लगभग 1.25 लाख के आसपास थी, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा 1.29 लाख को पार कर गया। सबसे महत्वपूर्ण प्रगति अगस्त और सितंबर के महीनों में देखने को मिली, जब सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या 1.70 लाख के आंकड़े को भी पार कर गई, जो राज्य की स्वास्थ्य मशीनरी की सक्रियता और बेहतर प्रबंधन का जीवंत प्रमाण है।
अक्टूबर और नवंबर में भी बरकरार रहा उत्साह
अक्टूबर और नवंबर के महीनों में भी यही सकारात्मक रुख पूरी तरह बरकरार रहा, जहाँ पिछले साल के मुकाबले हजारों की संख्या में अधिक प्रसव दर्ज किए गए। विशेष रूप से अक्टूबर के महीने में आंकड़ों में आई भारी वृद्धि यह दर्शाती है कि दूर-दराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुलभ हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल सरकारी कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में अब लोग घर के असुरक्षित प्रसव के बजाय अस्पताल की सुरक्षित व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पटना की रूबी ( बदला हुआ नाम ) जिन्होंने तीन महीने पहले गर्दनीबाग अस्पताल में एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है बताती हैं कि अस्पताल में उन्हें सारी सुविधा मिली और उनका एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ. मैं और मेरी तीन महीने की बेटी पुर्णतः स्वस्थ हैं. वहीँ कैमूर की आशा कार्यकर्ता रोसिला देवी कहती हैं कि लोगों का भरोसा सरकारी अस्पताल पर पहले के मुकाबले बढ़ा है. इसके लिए दवा की उपलब्धता, नवीनतम उपकरण और कुशल चिकित्सकों की उपलब्धता एक बड़ा कारण है.
सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का मिला लाभ
एम्स पटना की डॉ. इंदिरा प्रसाद बताती हैं कि जननी सुरक्षा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ और सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के साथ-साथ कुशल डॉक्टरों व नर्सों की उपलब्धता ने इस बड़े बदलाव में मुख्य भूमिका निभाई है। स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली मुफ्त दवाओं और सुरक्षित प्रसव की गारंटी ने गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को निजी अस्पतालों के भारी खर्च से भी बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव में आई यह निरंतर वृद्धि आने वाले समय में मातृ और शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने में मील का पत्थर साबित होगी।
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