नीतीश कुमार के लिए मार्च केवल कैलेंडर का एक महीना नहीं, बल्कि उनके करियर के ‘टर्निंग पॉइंट्स’ का गवाह रहा है। आइए जानते हैं मार्च महीने से जुड़े उनके जीवन के सबसे खास पड़ाव:
1. 1 मार्च: जन्मदिन और नई शुरुआत
नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को हुआ था। उनके लिए मार्च का महीना हमेशा से व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से खास रहा है। इसी महीने में वे अक्सर बड़े नीतिगत फैसले लेते रहे हैं।
2. 3 मार्च 2000: पहली बार मुख्यमंत्री की शपथ
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के सफर की शुरुआत भी मार्च में ही हुई थी। उन्होंने 3 मार्च 2000 को पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, बहुमत की कमी के कारण यह कार्यकाल केवल 7 दिनों का रहा, लेकिन यहीं से बिहार की राजनीति में ‘नीतीश युग’ की नींव पड़ी थी।
3. 5 मार्च 2026: राज्यसभा के लिए नामांकन (पटना से दिल्ली)
लगभग 20 वर्षों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहने के बाद, नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना पर्चा भरा। यह उनके ‘चारों सदनों’ (विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा) का सदस्य बनने के सपने को पूरा करने की दिशा में अंतिम कदम है।
[Timeline infographic: March 1, 1951 (Birth) -> March 3, 2000 (1st CM Oath) -> March 5, 2026 (Rajya Sabha Nomination)]क्यों खास है यह ‘मार्च कनेक्शन’?
दशकों का चक्र: जिस मार्च (2000) में उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी पहली बार संभाली थी, उसी मार्च (2026) में वे उस कुर्सी को छोड़कर देश के उच्च सदन (Upper House) की ओर बढ़ रहे हैं।
बदलाव का महीना: मार्च 2026 में ही बिहार को पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिलने की संभावना जताई जा रही है, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा ‘शिफ्ट’ है।
राष्ट्रीय राजनीति: अमित शाह की मौजूदगी में हुए इस नामांकन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार अब केंद्र में NDA के लिए एक ‘मार्गदर्शक’ और रणनीतिकार की भूमिका निभाएंगे।
नीतीश कुमार का ‘ऑल-हाउस’ सफर
नीतीश कुमार उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने भारतीय संसदीय प्रणाली के चारों सदनों की सदस्यता प्राप्त की है:
लोकसभा: वे कई बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे।
विधानसभा: बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुख्यमंत्री रहे।
विधान परिषद: वर्तमान में भी वे परिषद के सदस्य हैं।
राज्यसभा: अब मार्च 2026 में वे राज्यसभा सांसद बनने जा रहे हैं।
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