प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ने पटना में धूमधाम से मनाया 90वीँ त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव

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 पटना : प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ने शनिवार को  पटना में 90वीँ त्रिमूर्ति शिव महोत्सव समारोह  बड़े उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया।
  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं शिव ध्वजारोहण से हुई।
  प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व डीजीपी एसके भारद्वाज ने समाज मे सकारात्मक योगदान के लिए प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी संस्था की सराहना की।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी उदय कुमार सिंह ने कहा कि सनातन संस्कृति के सभी पर्व त्योहारों को ब्रम्हाकुमारी ने जीवित रखा है।
इस अवसर पर ब्रम्हकुमारी पटना सब जोन की प्रभारी बीके संगीता ने कहा कि साल के तीन सौ पैंसठ दिन कोई ना कोई उत्सव होता है। उन्होंने कहा  कि पर्व और त्योहार में एक फर्क होता है। त्योहार का सम्बंध उत्सव से है लेकिन पर्व विधि विधान के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कर्म महत्वपूर्ण है और उसी के हिसाब से इंसान को सबकुछ प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि इंसान के कर्मों के अनुसार ही उसकी जिंदगी निर्धारित होती है। परम् पिता शिव कल्याणकारी हैं और वह हमें सारगर्भित अर्थ बताते हैं। उन्होंने कहा कि स्वार्थ और बुराईयों से उपर उठ कर किया गया कर्म ही इंसान को पुण्य का भागी बनता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के अंदर देवत्व छिपा होता है। इस मृत्यलोक मे भी अपने व्यवहार से वह देवत्व हासिल कर सकता है।
बीके ज्योति ने कहा कि शिव सुख, शांति, आनन्द, करुणा और तमाम अनुभूतियों के सागर है। महा शिव रात्रि को शिव को प्रसन्न करना है तो मनुष्य को अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करना होता है।
इस कार्यक्रम में  पटना उच्च न्यायालय के न्यायधीश संजय कुमार, राष्ट्रीय जनता दल की नेता मधु मंजूरी, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती प्रिया सिंह, गोल्डमैन के नाम से मशहूर प्रेम सिंह, जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश महासचिव निखिता तिवारी, सिटीजन ग्रुप के एमडी चन्दन कुमार , समाजसेवी विनय पाठक, बीके अनीता, संजय कुमार, नीरज कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी की शिक्षा में  राजयोग ध्यान पर विशेष बल दिया जाता है। इसके अनुसार कहा जाता जा कि सर्व शक्तियों के स्रोत परमात्मा हैं। यह परखने, समेटने, विस्तार, समाने, सहयोग, निर्णय, सामना और सहने की शक्तियों के विकास से जुड़ा है। इससे मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ,मोह,अहंकार, ईर्ष्या और आलस्य के नियंत्रण में मदद मिलती है। शिव की महिमा अपरंपार है और ॐ नमः शिवाय तथा ओम शांति जीवन का मूल मंत्र है।
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