Live News 24×7 के लिए मोतिहारी से अशोक वर्मा।
विहार का महापर्व छठ का संध्या का अर्द्ध बडे ही श्रद्धापूर्वक माता बहनो के साथ पुरूष छठ व्रतियो ने दिया। मोतीझील रोड बनने के बाद इस वर्ष झील के सौंदर्य मे चाँद लग गया,झील पथ का नामकरण शहरवासियो ने मेरीन ड्राइव पथ रख दिया है।

झील के किनारे के तमाम छठ घाटो का अब जगह परिवर्तन कर नया घाट निर्माण हो जाने से उसकी प्राकृतिक सुंदरता मे और भी ज्यादा निखार आ चुकी है। वृक्षे स्थान घाट,कदम घाट तो अब नगर का सबसे खुबसुरत घाट हो चुका है। नगर निगम का अगर कोई प्रत्यक्ष विकास और प्रशंसनीय कार्य देखना हो तो यह घाट है जो
खुद बता रहा है।
शहर के मुख्य घाटों में सुप्रशिद्ध श्री राम लक्ष्मण घाट हनुमान गढ़ी, मनरेगा घाट, रोईग क्लब घाट, धर्म समाज घाट, गायत्री मंदिर घाट, बेलीसराय घाट, वृक्षेस्थान घाट, साहू घाट, रमना घाट, बेलबनवा मछुआ टोली घाट, डॉक्टर स्वस्ति सिन्हा निर्मित गोपाल पुर घाट,रघुनाथ पुर घाट के अलावा अन्य सभी घाटो पर दिन मे 1 बजे से छठ व्रतियो का आना आरंभ हो गया।
काफी व्रति दंड देते हुये घाट पर पहूचे।सभी घाट छठ गीत से गुंजायमान थे। सिरसोपता के चारो ओर छठ व्रति महिलाये पारंपरिक विधि विधान से पूजा आदि की। भारतीय धर्म संस्कृति मे छठ ही एकमात्र ऐसा महापर्व है जिसमे व्रति छठी मईया से बेटी मांगती है। बिहार के सबसे बडे इस महापर्व के उद्देश्य और इसके गीत के रहस्य को अगर आम माता एवं भाई समझे रहते तो आज जो जनसंख्या मे कन्या का अनुपात घटा है वह नही घटता।
प्रकृति ने तो संतुलित संख्या दी लेकिन माता और भाइयो ने उस अनुपात को तोड प्रकृति और ईश्वरीय विधान के विपरित काम किया।परिणाम घातक हुआ। छठ व्रत विहार का महापर्व है जो अपने आप मे पावरफुल चुंबक का काम करता है। बाहर कमाने गये कोई भी विहारी छठ के किसी भी गीत की छोटी पंक्ति भी अगर सुन ले तो वह निश्चित भागा भागा छठ मे अपने घर निश्चित आयेगा।
टूटते बिखरते पारिवारिक दौर मे छठ व्रत पारिवारिक बोध के साथ एकता के सूत्र मे बांधता है। सभी घाटो पर अर्द्ध पडने के पहले व्रति महिलाये पानी मे घंटो खडी रही।अर्द्ध के बाद सभी एक दुसरी महिला के नाक से मांग तक सिन्दूर लगाई। बहु और बेटियों ने व्रति के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। वहीं प्रशासन द्वारा सभी घाटों पर सुरक्षा का पूरा प्रबंध किया गया था। पुलिस पेट्रोलिंग भी लगातार जारी थी।
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