आस्ट्रेलिया की धरती पर डाॅ. नीतू कुमारी नूतन बिहार व भारतीय लोक-कला के बिखेर रही हैं रंग

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आस्ट्रेलियाई सरकार के आमंत्रण पर भारत सरकार के आईसीसीआर ने डाॅ.नूतन को 12 सदस्यीय टीम के साथ आस्ट्रेलिया भेजा।
आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न व सिड़नी के मंचो पर डाॅ.नूतन टीम के साथ भारत के विभिन्न राज्यों की लोक कला – संस्कृति की झाॅकियों का करेंगी मनोहारी प्रदर्शन।

Live News 24×7 के कैलाश गुप्ता की रिपोर्ट

मोतिहारी। भारत की लोक संस्कृति की राजदूत कही जाने वाली बिहार व भारत की समृद्ध कलात्मक विरासतो को देश- विदेश मे स्थापित करने वाली राष्ट्रपति अवार्डी एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात कला शख्सियत डाॅ. नीतू कुमारी नूतन आस्ट्रेलिया की धरती पर अपने फन का जादू बिखेर रही हैं।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय अंतर्गत आईसीसीआर ने आस्ट्रेलिया सरकार के आमंत्रण पर डाॅ.नूतन के साथ बारह सदस्यीय टीम आस्ट्रेलिया भेजा है। डाॅ.नूतन अपनी टीम के साथ पहुँच गयी हैं, जहाँ मेलबोर्न में आज शाम उन्होंने अपनी टीम के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुति का आगाज कर दिया है।

डाॅ.नूतन एवं उनकी टीम दिनांक 25 अक्टूबर से 02 नवंबर तक आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न एवं सिडनी राज्य में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक मंचो पर बिहार व भारत की प्रमुख लोक कला-लोक संस्कृति एवं लोक विरासतो को सहेजकर गीत एवं नृत्य के माध्यम से प्रदर्शित करेंगी।

डाॅ. नूतन ने बताया कि आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न एवं सिडनी के विभिन्न मंचो पर वे दिपावली, छठ महापर्व के गीत- नृत्य के साथ बिहार की पारंपरिक लोक संस्कृति व उत्तरप्रदेश की लोक कलाओ के विभिन्न स्वरुप तथा विशेषताओं को खासतौर पर रखेंगी।

उसके साथ भारत की समृद्ध लोक संस्कृति- लोक विरासत जैसे — अवधि, बनारस की लोक विधाएँ, मिर्जापुरी गीतों की लड़ी, गुजरात का डांडिया नृत्य सहित भारत के कई राज्यों की प्राचीन लोक कला – लोक संस्कृति की झाॅकियों की प्रस्तुति भी वे अपने गायन एवं टीम के कलाकारो द्वारा नृत्य के माध्यम से करेंगी।

डाॅ.नूतन ने कहा कि आस्ट्रेलिया मे वे चार – पाॅच दशक से विलुप्त हो चुकी बिहार व चंपारण की अति प्राचीन पारंपरिक व प्रचलित लोक शैली ‘पीड़िया’ का नये संस्करण के साथ अपने गीत एवं टीम द्वारा नृत्य के माध्यम से प्रदर्शन करेंगी।

भारत सरकार के संगीत नाटक अकादेमी द्वारा नमित ‘ राज्य गुरु’ डाॅ. नूतन ने बताया कि इसके अलावा बिहार की अति प्राचीन व चार- पाॅच दशक से विलुप्त हो रही ‘बिम्बो’ लोक संस्कृति को पुनर्जीवित कर नये शोध एवं नयी शैली के रुप में उन्होंने कुछ नये गीत व नृत्य जोड़कर तैयार किए हैं।

डाॅ.नूतन ने कहा कि अति प्राचीन लोक विधा ‘बिम्बो’ में नये शोध के बावजूद इसकी मौलिकता को बरकरार रख इसे फिर से जीवंतता प्रदान की गई है, जिसे इन अंतरराष्ट्रीय मंचो पर इसे वे खासतौर पर प्रदर्शित करेंगी।

डाॅ.नूतन ने बताया कि उनके साथ टीम में बिहार की स्थापित युवा गायिका सुश्री सिमरन, श्रुति, आशीष जौनी, संजना, कमलेश देव, शिखा जौनी, सुदामा पाण्डेय , राजन, सोनाली, मानवी, राजन एवं भोला जैसे प्रतिभावान कलाकार गए हैं।

डाॅ.नूतन ने अपनी इस यात्रा के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय आईसीसीआर एवं आमंत्रण के लिए आस्ट्रेलिया सरकार के प्रति आभार जताया है।

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