जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की हुई शुरुआत

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  • जिले के एक से 19 वर्ष तक के बच्चों को खिलाई जाएगी एल्बेंडाजोल की दवा 
  • निजी स्कूलों में भी छात्रों को खिलाई जाएगी एल्बेंडाजोल की दवा
  • 19 सितंबर को चलाया जाएगा मॉप अप राउंड 
मुजफ्फरपुर। जिले में मंगलवार से राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की शुरुआत हो गयी। इसकी शुरूआत सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार एवं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार पांडे ने आदर्श मध्य विद्यालय, बैंक रोड, मुजफ्फरपुर में लगभग 100 बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर की। इस कार्यक्रम के तहत जिले के एक वर्ष से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने और कृमि मुक्ति के लिए 16 सितंबर से एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जा रही है। कार्यक्रम के मौके पर डीआईओ डॉ एस के पांडे ने कहा कि यह दवा निजी विद्यालयों के बच्चों को भी खिलानी है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए माइक्रो प्लान तैयार किया है। हर हाल में इस बात का ध्यान देना है कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो और खाली पेट दवा न खिलाएं। लाइन लिस्टिंग के अनुसार शिक्षकों व आशा के समक्ष ही दवा का सेवन कराएं। जिले के लगभग 28.5 लाख पात्र बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। यह कार्यक्रम जिले के लक्षित 3556 सरकारी स्कूल, 641 प्राइवेट स्कूल और 4549 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चलाया जा रहा है। दवा से वंचित बच्चों को मॉप अप राउंड के दिन 19 सितंबर को दवा खिलाई जाएगी।
गोली को पूरी तरह चबाकर खाएं: 
सिविल सर्जन ने बताया कि एल्बेंडाजोल की दवा को हमेशा चबाकर ही खाएं। दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में जी मिचलाना, उल्टी, दस्त और कमजोरी जैसे कुछ साइड इफेक्ट्स का अनुभव हो सकता है। ऐसे में उन्हें पूर्ण आराम दें। किसी भी प्रतिकूल प्रभाव के लिए स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे।
1 से 2 साल के बच्चों को अल्बेन्डाजोल 400 एमजी आधी गोली और 2 से 3 साल के बच्चों को पूरी गोली खिलाएं। गोली को दो चम्मच के बीच रखकर पूरी तरह चुरा करें और साफ पानी में मिला कर ही खिलाएं। वहीं 3 से 19 साल के बच्चों को एक पूरी गोली अच्छे तरह से चबाकर पानी के साथ खाने का निर्देश दें, ऐसा न करने से गोली गले में अटक भी सकती है।
मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार पाण्डेय, प्रभारी डीसीएम डॉ प्रशान्त कुमार, जिला डाटा सहायक राज किरण, जिला समन्वयक एविडेन्स एक्शन प्रभात रंजन सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थें।
कृमि संक्रमण के लक्षण: 
गंभीर कृमि संक्रमण से दस्त पेट में दर्द कमजोरी उल्टी और भूख न लगना सहित कई सारे लक्षण हो सकते हैं। बच्चे में कृमि की मात्रा जितनी अधिक होगी उसमें संक्रमण के लक्षण उतने ही अधिक होंगे। हल्के संक्रमण वाले बच्चों एवं किशोरों में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते हैं।
डीवार्मिंग(कृमि मुक्ति) के फायदे:
रोग प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि।
स्वास्थ्य और पोषण में सुधार।
एनीमिया में नियंत्रण।
समुदाय में कृमि के फैलाव में कमी।
सीखने की क्षमता और कक्षा में उपस्थिति में सुधार।
वयस्क होने पर काम करने की क्षमता में बढ़ोतरी।
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