जिले के कालाजार प्रभावित स्थानों पर रोगी खोज अभियान की हुई शुरूआत

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  • प्रभावित क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता घर-घर दे रही है दस्तक 
  • लगातार बुखार, कमजोरी हो तो कराएं कालाजार की जाँच:सीएस 
बेतिया : जिले के कालाजार प्रभावित स्थानों पर आशा के द्वारा कालाजार मरीजों की खोज अभियान की शुरुआत 17 जून से की गईं है जो 26 जून तक चलेगी।कालाजार मरीजों की खोज हेतु आशा फैसिलीटेटर व स्वास्थ्य कर्मियों क़ो प्रशिक्षण दिया चूका है। इस सम्बन्ध में भीबीडीएस प्रकाश कुमार ने बताया की जिले के 10 प्रखंडो में प्रभावित 21 गाँव के 4 हजार 418 घरों में खोज की जा रही है। इस दौरान लोगों क़ो कालाजार के बारे में जागरूक किया जा रहा है ताकि कालाजार के मामलों में कमी आ सकें। उन्होंने बताया की 2022 में भीएल के 04, पीकेडीएल 07, 2023 में भीएल 03, पीकेडीएल 02, 2024 में भीएल 01, पीकेडीएल 02, 2025 में अभी तक भीएल 01 और पीकेडीएल के 01 मरीज प्रतिवेदित हुए हैं। यह अभियान जिले में 10 दिनों तक चलेगा। जिले के सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने बताया कि बालू मक्खी के काटने से कालाजार होता है। कालाजार प्रभावित प्रखंडों में प्रतिवेदित कालाजार मरीजों के घर के 500 मीटर के परिधि में (200 से 250 घर) घर-घर जाकर वीएल, एचआईभी और पीकेडीएल रोगी की खोज जाएगी। क्षेत्र में अभियान की सफलता को लेकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। डीभीबीडीसीओ डॉ हरेंद्र कुमार ने बताया की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कालाजार जांच की सुविधा उपलब्ध है। कालाजार जांच किट (आरके-39) से 10 से 15 मिनट के अंदर टेस्ट हो जाता है। हर सेंटर पर कालाजार के इलाज में विशेष रूप से प्रशिक्षित एमबीबीएस डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4000 रुपये की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है।
ऐसे लक्षण वालों क़ो हो सकता है कालाजार, जाँच जरूर कराएँ:
•15 दिन से ज्यादा से बुखार हो
•जिन्हें भूख नहीं लगती हो, उदर बड़ा हो रहा हो
•जिनका वजन लगातार कम हो रहा हो
•शरीर काला पड़ रहा हो
• बुखार न हो पर शरीर पर दाग हो और पूर्व में कालाजार के रोगी रह चुके हों
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