जागरूकता आई काम पिता की तत्पर्यता के कारण बची “अंचल” की जान

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  • चमकी की पहचान होते जीएमसीएच में हुआ ईलाज
  • 07 दिनों तक भर्ती एवं ईलाज के बाद हुई ठीक, बच्चे का प्रभारी ने घर जाकर किया फॉलोअप 
बेतिया। एईएस/चमकी रोग की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान लोगों को चमकी के लक्षणों व इससे बचाव के तरीके बताए जा रहें है ताकि चमकी के मामलों में कमी आए। जिले में चमकी बुखार का अभी तक 04 मामले है जिनमें एक मामला सीएचसी चनपटिया से आया है। जिसमें चनपटिया अंतर्गत ग्राम सीरिसिया निवासी दामु साह की पुत्री अंचल कुमारी जो 2.5 वर्ष की है उसे 15 अप्रैल 25 क़ो घर पर सुबह में अचानक चमकी आया। बुखार, कपकपी, अकड़न, सुस्ती, के लक्षण होने शुरू हो गए। जिससे घर वाले काफ़ी घबरा गए। अंचल के पिता दामू साह क़ो चमकी के विषय में कुछ जानकारी थीं क्योंकि उसने अखबारों में इसके बारे में पढ़ा था एवं आशा के द्वारा गाँव में चमकी के लक्षण व ईलाज के बारे में सुना था की चमकी होने पर देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसे लक्ष्ण हो तो तुरंत ईलाज कराना चाहिए। इसलिए उसने बिना देरी किए बच्चे क़ो जीएमसीएच मेडिकल मे इलाज के लिए लाया। जहाँ चिकित्सक ने उसके बच्ची क़ो भरती किया। 07 दिनों तक सफल इलाज के बाद 21 अप्रैल को अंचल अपने घर वापस लौट गई। इसतरह उसकी जान बच सकी। दामू साह ने बताया की ठीक होने के बाद सीएचसी चनपटिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रदीप कुमार, आशा, आशा फैसिलिटेटर व स्वास्थ्य कर्मियों ने घर जाकर मेडिकल टीम के साथ फॉलोअप किया। उन्होंने बताया की ईश्वर की कृपा से बच्ची की जान बची है। अब बच्ची के ठीक होने पर वे गाँव, समाज क़ो इसके बारे में जागरूक करेंगे की ऐसी स्थिति हो तो लोग झाड़ फुक, ओझा, के चक्कर में नहीं पड़े, बिना देरी किए निजी गाड़ी या एम्बुलेंस से तुरंत मेडिकल कॉलेज बेतिया में ईलाज के लिए लाएं। वहीं डीभीबीडीसीओ डॉ हरेंद्र कुमार के निर्देश पर जिला मलेरिया कार्यालय से भीडीसीओ गणेश कुमार, प्रशांत कुमार एवं भीबीडीएस प्रकाश कुमार, सुजीत कुमार ने भी बच्चे के वर्तमान स्थिति का जयाजा लिया एवं आसपास के लोगों क़ो जागरूक रहने एवं लक्षण दिखते ही सरकारी अस्पताल पर लाने के कहा। वहीं सस्पेक्टेड केसेस की क्षेत्र में खोज की गईं। भीबीडीएस गणेश कुमार ने बताया की जागरूकता बहुत बड़ा काम आई है बच्ची के पिता की जागरूकता एवं तत्पर्यता के कारण ही “अंचल” की जान बच पाई है। उन्होंने कहा की सभी आशाओं क़ो सीएस द्वारा संध्या चौपाल कर चमकी के लक्षण, व इलाज के बारे में जागरूक करने, अपने पास ओआरएस पैकेट औऱ पैरासिटामोल की दवा रखने का निर्देश दिया गया है।
बचाव के लिए बरतें सावधानी:
सीएस डॉ विजय कुमार ने बताया की चमकी से बचाव के लिए अभिभावक अपने बच्चे को धूप से बचाएं। रात को किसी भी हालत में भूखे नहीं सोने दें। सोने से पहले कुछ मीठा जरूर खिलाएं। दिन में एक बार ओआरएस घोल कर जरूर पिलाएं। बच्चे को कच्चा एवम सड़े-गले फल नहीं खाने दें। बच्चा अगर घर में भी है तो घर की खिड़की व दरवाजा बंद नहीं करें। हवादार रहने दें।
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