राज्य में कुल प्रजनन दर को और किया जाएगा कम

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  • 13 उच्च प्राथमिकता वाले जिले भी हुए चिन्हित 
  • परिवार नियोजन में राज्य औसत पर जिलों को लाने का हो रहा प्रयास 
पटना। राज्य में जनसंख्या स्थिरीकरण एवं कुल प्रजनन दर में कमी लाने के लिए प्रयत्नशील है। कुल प्रजनन दर में कमी लाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने परिवार नियोजन कार्यक्रम में जिलों की स्थिति के अनुसार 13 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों को चिन्हित किया है। जहां योग्य दंपत्तियों को परिवार नियोजन के स्थायी और आधुनिक साधनों के इस्तेमाल के उपयोग को बढ़ाने को कहा गया है। संसाधनों के इस्तेमाल को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर सहित स्वास्थ्य उपकेंद्र तक के सभी स्वास्थ्य ईकाइयों पर दृढ़ता से पालन करने को कहा गया है। परिवार नियोजन में जिन जिलों पर विभाग अपना फोकस कर रही है उनमें अररिया, बेगुसराय, मोतिहारी, कटिहार, खगड़िया, पूर्णिया, सहरसा, सीतामढ़ी, भागलपुर, दरभंगा, जहानाबाद, मधुबनी एवं वैशाली शामिल है।
राज्य औसत पर जिलों को लाने का लक्ष्य:
परिवार नियोजन साधन के उपयोग में जो जिले राज्य औसत से कम हैं,उन्हें राज्य औसत के करीब लाया जाएगा। राज्य में योग्य दंपत्तियों के द्वारा एमपीए अंतरा की उपयोगिता का राज्य औसत करीब 0.8 प्रतिशत तथा पोस्ट पार्टम आईयूसीडी में राज्य का औसत 21 है। इसके अलावा फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टीक मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम में राज्य का औसत 70 प्रतिशतहै। परिवार नियोजन के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष परिवार विकास अंतर्गत 4 बार विशेष अभियान का संचालन कर परिवार नियोजन के साधनों के उपयोग के लिए योग्य दंपत्तियों कें बीच इस्तेमाल को जागरूक किया जाता है।
राज्य में अंतरा का इस्तेमाल सबसे ज्यादा:
परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों में राज्य की महिलाएं सबसे ज्यादा अंतरा सूई का प्रयोग कर रही हैं। वर्ष 2024- 25 में लगभग 6.50 से 7 लाख अंतरा सूई का इस्तेमाल हो चुका है। वहीं दूसरे नंबर पर राज्य में लगभग 3.5 लाख महिलाओं ने कॉपर टी का इस्तेमाल किया है।
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