- कुल 216 एफआरयू हैं क्रियाशील
- दिसंबर 23 तक मात्र 70 एफआरयू में थी सिजेरियन प्रसव की व्यवस्था
पटना। स्वास्थ्य विभाग मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए एफआरयू यानी फर्स्ट रेफरल यूनिट को सशक्त करने के प्रयास में जुटी है। इस पहल के तहत राज्यभर में एफआरयू में नाइट सी-सेक्शन सेवाओं को सशक्त करने का असर भी दिख रहा है। पिछले एक साल में जनवरी तक सिजेरियन प्रसव से युक्त एफआरयू की संख्या 70 से 100 पर पहुंच चुकी है। मालूम हो कि राज्य में अभी कुल क्रियाशील एफआरयू की संख्या 216 है। सिजेरियन प्रसव से युक्त संसाधन होने से एफआयू में रात्रि में भी जटिल प्रसव के मामलों का सुरक्षित रूप से निपटारा हो रहा है। इस संबंध में एम्स पटना की एडिशनल प्रोफेसर सह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. इंदिरा प्रसाद ने बताया कि क्रियाशील एफआरयू पर रात्रि में सी-सेक्शन सेवाओं की उपलब्धता से प्रसवकालीन आपात स्थितियों में महिलाओं को समय पर चिकित्सा सहायता मिलेगी। इससे राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त होंगी।
इस वर्ष जनवरी तक 43285 सिजेरियन प्रसव:
मातृ स्वास्थ्य के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ नागेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष 2024-25 में जनवरी तक राज्य के एफआरयू में कुल 43 हजार 285 सिजेरियन प्रसव हुए हैं। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 47 हजार 262 तथा वर्ष 2022-23 में कुल 39 हजार 830 सिजेरियन प्रसव कराए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सुरक्षित सी-सेक्शन सेवाएं, विशेष रूप से रात के समय, मातृ और नवजात मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आपातकालीन प्रसव सेवाओं की उपलब्धता यह सुनिश्चित करती है कि सभी महिलाओं को समय पर जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता मिल सके।
