गया : गया जिले में 20 सूत्री जीवीकार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के गठन के बाद से ही विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हाल ही में प्रकाशित हुई जिलास्तरीय समिति की सूची में माहुरी वैश्य समुदाय, विशेष रूप से माहुरी वैश्य समाज, को नजरअंदाज किया गया है। इस निर्णय से माहुरी समाज में गहरी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।माहुरी वैश्य समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिले में माहुरी वैश्य समाज की राजनीतिक सक्रियता और चुनावों में निर्णायक भूमिका किसी से छुपी नहीं है। यह समाज भाजपा का एक कोर वोटर समूह माना जाता है, जो वर्षों से पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद, 20 सूत्री समिति में माहुरी समाज को कोई स्थान नहीं दिया गया है। यह निर्णय माहुरी वैश्य समुदाय के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।समिति में माहुरी वैश्य समाज को नहीं मिला प्रतिनिधित्व 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति में माहुरी वैश्य समाज को स्थान नहीं दिया गया। इस कारण से पूरे वैश्य समाज में असंतोष और आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह समुदाय अब भाजपा से अपनी उपेक्षा के कारण काफी नाराज है, और इसके चलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल में तनाव बढ़ गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, माहुरी वैश्य समुदाय के प्रमुख नेताओं ने इस मामले पर गहराई से चर्चा करने के लिए एक पूरे वैश्य जाती का सामूहिक बैठक का आह्वान किया है। इस बैठक में आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा और आगामी चुनावों के लिए समाज की भूमिका पर पुनर्विचार किया जा सकता है। माहुरी समाज की इस नाराजगी को देखते हुए भाजपा के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन सकती है।माहुरी वैश्य समाज भाजपा का एक प्रमुख समर्थन समूह रहा है। यदि इस समाज का असंतोष इसी तरह बना रहा तो आगामी चुनावों में भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए, भाजपा को माहुरी वैश्य समाज के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही उचित कदम उठाने होंगे, अन्यथा यह असंतोष आगामी चुनावों में भाजपा के लिए गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है।
माहुरी वैश्य समुदाय की इस नाराजगी से गया जिले की राजनीति में उथल-पुथल मचने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।जिससे भाजपा की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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