रामगढ़/ कैमूर। सोन नदी बेसिन में जल उपलब्धता के पुनर्निर्धारण को लेकर बिहार के हितों का मुद्दा अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री को पत्र लिखकर सोन बेसिन में कथित अतिरिक्त जल के आधार पर बिहार के हिस्से के पानी के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। सांसद ने कहा है कि जब तक सोन बेसिन में उपलब्ध वास्तविक और उपयोग योग्य जल का स्वतंत्र, पारदर्शी एवं वैज्ञानिक आकलन नहीं हो जाता, तब तक वर्ष 1973 के बाणसागर एकरारनामे के तहत निर्धारित जल हिस्सेदारी में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
सांसद ने पत्र में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जल उपलब्धता के आंकड़े में हुई बढ़ोतरी को लेकर उठाया है। उनके अनुसार वर्ष 1973 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के सम्मिलित सोन नदी बेसिन में कुल जल उपलब्धता 14.25 MAF आंकी गई थी, जबकि वर्तमान में इसे 19.6335 MAF बताया जा रहा है। सांसद ने पूछा है कि करीब 5.3835 MAF अतिरिक्त उपयोग योग्य जल आखिर किस वैज्ञानिक आधार पर उपलब्ध माना गया है।
पत्र में कहा गया है कि केवल किसी प्रणाली में दर्ज अतिरिक्त डिस्चार्ज को सिंचाई योग्य पानी मान लेना उचित नहीं होगा। इंद्रपुरी बराज की SCADA प्रणाली से प्राप्त आंकड़ों में “Unmanaged Surplus Discharge” भी शामिल होने की बात कही गई है। सांसद ने इस प्रकार के डिस्चार्ज को वास्तविक सिंचाई योग्य जल उपलब्धता में शामिल किए जाने पर सवाल उठाते हुए वास्तविक नदी प्रवाह और नहर के उपयोग योग्य आउटफ्लो के आधार पर आकलन की मांग की है।
सांसद ने बिहार की सिंचाई परियोजनाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। पत्र में कैमूर के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र की सिंचाई जरूरतों से जुड़ी जमानियां पंप नहर परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि एक तरफ बिहार की परियोजनाएं पानी का इंतजार कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सोन बेसिन में अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में इस अतिरिक्त पानी के वास्तविक उपयोग और उपलब्धता पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।
बाणसागर एकरारनामे के तहत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सोन नदी के जल का अनुपात 5.25 : 2.75 : 1.25 निर्धारित किए जाने का भी पत्र में उल्लेख है। साथ ही सोन की सहायक नदी कनहर से बिहार को निर्धारित जल हिस्सेदारी के संबंध में भी मौजूदा स्थिति की समीक्षा की मांग की गई है।
सांसद ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित नौ Pumped Storage Projects के लिए सोन नदी से पानी की मांग का मुद्दा भी उठाया है। पत्र के अनुसार इन परियोजनाओं के लिए कुल 239.79 MCM जल आवश्यकता दर्शाई गई है। सुधाकर सिंह ने मांग की है कि नई व्यावसायिक एवं ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सोन का पानी उपलब्ध कराने से पहले बिहार की सिंचाई जरूरतों और नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि सोन नदी का पानी केवल राज्यों के बीच बांटने वाली मात्रा नहीं है। नदी का पर्याप्त पर्यावरणीय प्रवाह, भूजल पुनर्भरण, जलीय पारिस्थितिकी और नदी किनारे बसे लोगों की जरूरतें भी जल आकलन का हिस्सा होनी चाहिए।
सांसद ने केंद्र सरकार से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों तथा स्वतंत्र जल विशेषज्ञों की मौजूदगी में उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर सभी जल आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि पहले सोन बेसिन के वास्तविक उपयोग योग्य पानी का निष्पक्ष आकलन हो, उसके बाद ही किसी नए जल पुनर्बंटवारे पर विचार किया जाए।
सोन के पानी को लेकर सांसद का यह पत्र बिहार के किसानों और सिंचाई व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। अब निगाहें केंद्र सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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