अशोक वर्मा
मोतिहारी : चंचल बाबा आश्रम में आयोजित महान कवि संत तुलसीदास की जयंती बड़े भक्ति भाव से मनाई गई कार्यक्रम का शुभारंभ भजन कीर्तन से हुआ उसके बाद पीठाधीश्वर अनंत विभूषित श्री शक्ति शरणानंद जी महाराज उर्फ चंचल बाबा द्वारा भक्त शिरोमणि संत तुलसीदास की आरती और पूजन किया गया. पूजन के बाद अवकाश प्राप्त प्राचार्य प्रोफेसर राम निरंजन पांडे के कुशल संचालन में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया. विचार गोष्ठी के आरंभ में पंडित राजकुमार मिश्रा ने तुलसी साहित्य के विभिन्न प्रसंग को सुनाते हुए रामचरितमानस को सनातन संस्कृति के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ के रूप में बताया, उन्होंने बताया कि विसंगतियों से लड़ने के लिए श्री रामचरितमानस आमोद ब्रह्मास्त्र की तरह अचूक है. मुजफ्फरपुर से पधारे श्री प्रभात किरण ने रामचरितमानस को संपूर्ण वेद एवं शास्त्रों का सार संग्रह कहा. इसी ग्रंथ के द्वारा सनातन संस्कृति का विकास हो सका. पूर्व प्राचार्य डॉक्टर अरुण कुमार ने तुलसीदास को अवतरित कवि कहा. उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ अमूल्य है और इसमें शिक्षा नीति का समावेश है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री शक्ति शरणानंद जी महाराज उर्फ चंचल बाबा ने कहा कि अगर तुलसीदास रामचरितमानस को नहीं लिखते तो आज सनातन को पहचानने वाला कोई नहीं रहता, उन्होंने कहा कि तुलसी बाबा ने रामायण के माध्यम से समस्त मनुष्य समुदाय को एक सुगम मार्ग उपलब्ध कराया, जीने की कला बताई. रामचरितमानस भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया. कार्यक्रम में राम मनोहर,रामाधार दुबे,चंद किशोर मिश्रा, संदीप दुबे, प्रभु सिंह,शैलेंद्र तिवारी,महंत विजय दास, किरण दास सहित काफी श्रद्धालु एवं महात्मा उपस्थित थे.
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