बिहार में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का तांडव : मौसम विभाग का अलर्ट जारी

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बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) अब तटीय इलाकों से आगे बढ़ते हुए उत्तर भारत के कई राज्यों के मौसम को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने लगा है। विशेष रूप से पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण राज्य बिहार में इस चक्रवात के असर से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना (IMD Patna) और राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों से मिली ताजा अपडेट के मुताबिक, आगामी 28 अक्टूबर से राज्य के कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिसे लेकर प्रशासन और आम नागरिकों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात ‘अर्नब’ का बिहार के मौसम पर प्रभाव

दक्षिण-पूर्वी और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब अब एक गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले चुका है, जिसका नाम ‘अर्नब’ रखा गया है। हालांकि इस चक्रवात का सीधा लैंडफॉल यानी मुख्य केंद्र बिहार की सीमा पर नहीं होगा, लेकिन इसके प्रभाव से बंगाल की खाड़ी की ओर से लगातार नमी से भरपूर पूर्वी हवाएं बिहार के वायुमंडल में प्रवेश कर रही हैं। इस मौसमी हलचल के कारण पिछले कुछ दिनों से बनी शांत स्थिति अब बदलने लगी है। मौसम विभाग का कहना है कि 26 और 27 अक्टूबर तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में धूप खिली रहेगी और मौसम आमतौर पर शुष्क व सामान्य बना रहेगा, लेकिन जैसे ही घड़ी की सुई 28 अक्टूबर की ओर बढ़ेगी, आसमान में बादलों के डेरा डालने का सिलसिला तेज हो जाएगा।

28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश और तेज हवाओं का हाई अलर्ट

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ के असर से 28 अक्टूबर से बिहार के मौसम में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया जाएगा। इस दिन राज्य के कई दक्षिणी और पूर्वी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की शुरुआत हो सकती है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इसके बाद 29 अक्टूबर का दिन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इस दौरान पूरे बिहार के कई हिस्सों में भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की आशंका को देखते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ घोषित किया गया है। मौसम विभाग की चेतावनियों के मुताबिक इस अवधि में हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से थपेड़े मार सकती है। उत्तर बिहार और उससे सटे मैदानी इलाकों में बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने का अनुमान जताया गया है।

किसानों की बढ़ी चिंता, फसल और कच्चे मकानों को लेकर विशेष चेतावनी

इस चक्रवाती तूफान के संभावित असर को लेकर कृषि विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन विभागों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में खेतों में धान और अन्य खरीफ की फसलें पककर तैयार होने की स्थिति में हैं या कटाई के चरण में हैं। ऐसे में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं और मूसलाधार बारिश खेतों में खड़ी फसलों को जमीन पर गिरा सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों, टीन की छतों और झुग्गी-झोपड़ियों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। आकाशीय बिजली (वज्रपात) की घटनाओं से जान-माल और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।

आम जनता के लिए निर्देश और प्रशासन की मुस्तैदी

बिहार सरकार और जिला प्रशासन ने मौसम विभाग के इन इनपुट के बाद सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निचले और जलभराव वाले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मौसम वैज्ञानिकों ने आम नागरिकों, ड्राइवरों और विशेष रूप से किसानों से अपील की है कि वे 28 से 30 अक्टूबर के दौरान खराब मौसम और तेज आंधी-तूफान के समय अनावश्यक यात्रा करने से बचें। यदि बहुत जरूरी न हो तो खुले खेतों, पेड़ों या कमजोर संरचनाओं के नीचे शरण लेने से पूरी तरह परहेज करें। अपने मोबाइल पर मौसम विभाग के लेटेस्ट अपडेट्स और सरकार की चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखें, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सके।

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