- पांच पीढ़ियों तक उत्तराधिकारी का अधिकार देने की मांग, बिहार में भी लागू हो पेंशन
मोतिहारी। अशोक वर्मा। स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, लेकिन उनके परिवार आज भी सम्मान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय मासिक कार्यक्रम ‘10 बजे 10 मिनट स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीदों के नाम’ में रविवार को सेनानी परिवारों ने सरकार से अपने अधिकारों को लेकर जोरदार आवाज उठाई।
पूर्वी चंपारण जिला इकाई की ओर से नगर के ऐतिहासिक शौर्य स्तंभ पर आयोजित कार्यक्रम महान सेनानी दंपती सुखदेव प्रसाद सिंह एवं यशोदा देवी को समर्पित रहा। राष्ट्रध्वज फहराने और राष्ट्रगान के बाद सेनानी दंपती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और संघर्ष को याद किया गया।
आजादी के बाद भी सम्मान का इंतजार
समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक वर्मा ने कहा कि आजादी के बाद स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को राष्ट्रीय परिवार घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जिस परिवार ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाया, उसके सम्मान, सुरक्षा और अधिकार की जिम्मेदारी भी राष्ट्र की होनी चाहिए।
बिहार में दो पीढ़ी, मांग पांच की
मुख्य संरक्षक प्रो. खुश नंदन सिंह ने कहा कि उत्तराखंड, असम, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तीसरी पीढ़ी तक उत्तराधिकारी का दर्जा प्राप्त है, जबकि बिहार में यह सुविधा केवल दो पीढ़ियों तक सीमित है। उन्होंने बिहार सरकार से पांच पीढ़ियों तक उत्तराधिकारी का दर्जा देने की मांग की।
उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समिति की ओर से सेवा अभियान चलाने की घोषणा भी की।
‘सेनानी परिवारों का राष्ट्र पर पहला हक’
उत्तराधिकारी चंदा देवी ने कहा कि देश के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों के परिवारों का राष्ट्र पर पहला हक बनता है। केंद्र एवं बिहार सरकार को सेनानी उत्तराधिकारियों के लिए मुफ्त रेल-बस यात्रा तथा घर पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।
आदर्श बनें स्वतंत्रता सेनानी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पूर्व प्राचार्य शशिकला कुमारी ने कहा कि देश आज अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। इसका एक कारण समाज के सामने आदर्श व्यक्तित्वों की कमी भी है। स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और संघर्ष को नई पीढ़ी अपना आदर्श बनाए तो राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीयता और चरित्र निर्माण की भावना मजबूत होगी। देश को दिखावे की नहीं, बल्कि सच्ची राष्ट्रभक्ति की आवश्यकता है।
अभाव में जी रहे कई सेनानी परिवार
जिला अध्यक्ष कौशल किशोर पाठक ने चंपारण सत्याग्रह के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार को देर से ही सही, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारियों की समस्याओं की सुध लेनी चाहिए। आज भी अनेक सेनानी परिवार आर्थिक अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं।
महासचिव उमेश सिंह ने अपने माता-पिता के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनके पिता का मानना था कि जीवन और मृत्यु शाश्वत सत्य हैं, इसलिए जीवन को राष्ट्र के लिए कुछ कर सार्थक बनाना चाहिए।
प्राकृतिक आपदा में सेवा का संकल्प
कार्यक्रम में समिति ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में सेवा अभियान चलाने का संकल्प भी लिया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत केवल स्मरण करने की चीज नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा है।
कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष चंद्रमा पांडेय, अनिल मिश्रा, पत्रकार इंतजारूल हक, मेहसी के सत्यदेव आर्य, सत्यकाम आर्य, सुरेंद्र चौरसिया सहित बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सदस्य एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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मांगों का बॉक्स
सेनानी उत्तराधिकारियों ने सरकार के सामने रखी ये मांगें
स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को ‘राष्ट्रीय परिवार’ का दर्जा मिले।
सेनानी की पांच पीढ़ियों तक उत्तराधिकारी का दर्जा दिया जाए।
बिहार में भी स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी पेंशन लागू की जाए।
उत्तराधिकारियों को मुफ्त रेल एवं बस यात्रा की सुविधा मिले।
सेनानी परिवारों को घर पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
आर्थिक रूप से कमजोर सेनानी परिवारों के लिए विशेष सहायता योजना बनाई जाए।
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