शांति निकेतन एकेडमी, गया की सभी शाखाओं में ‘ग्रीन डे’ का भव्य आयोजन

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गया: शांति निकेतन एकेडमी की सभी शाखाओं—ए.पी. कॉलोनी, कटारी हिल रोड और गोविंदपुरम् (रौना, चाकंद)—में बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ ‘ग्रीन डे’ (हरियाली दिवस) का आयोजन किया गया है। इस वर्ष के कार्यक्रम का मुख्य विषय (थीम) “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।” रखा गया था। समारोह के दौरान पूरा विद्यालय परिसर हरे रंग की छटा से सराबोर नज़र आया, जहाँ प्लेग्रुप से लेकर सीनियर केजी तक के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया है। हरे रंग की आकर्षक पोशाकों में सजे बच्चों ने मंच पर शानदार रैंप वॉक कर सभी का मन मोह लिया, जिसमें प्लेग्रुप से समर्थ और सान्वी की प्रस्तुति बेहद खास रही है। बच्चों के रचनात्मक विकास और प्रकृति से जुड़ाव के लिए सब्जी प्रिंटिंग गतिविधि आयोजित की गई है, जिसमें नर्सरी से अंशिका और शिवांश ने अपनी कलात्मक प्रतिभा दिखाई है। वहीं, जूनियर केजी से काव्या और सृष्टि ने फ्रूट सलाद मेकिंग गतिविधि में बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इसके साथ ही मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं हैं। नन्हे बच्चों को प्रकृति को करीब से समझाने के लिए एक विशेष ‘टच एंड फील’ गतिविधि कराई गई, जिसमें सीनियर केजी से सिमरन और इल्मा ने विभिन्न प्राकृतिक चीज़ों को छूकर महसूस करने में उत्साहपूर्वक भाग लिया है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘शो एंड टेल’ गतिविधि के ज़रिए बच्चों को हरे रंग और प्रकृति के महत्व से परिचित कराया गया है। इसके अलावा, विद्यालय परिसर में एक विशेष पौधा रोपण अभियान चलाया गया, जिसमें बच्चों और शिक्षकों ने मिलकर पौधे लगाए और पृथ्वी को हरा-भरा रखने का संकल्प लिया है।
इस अवसर पर शांति निकेतन एकेडमी के चेयरमैन श्री हरि प्रपन्न ने थीम आधारित दिवस मनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ‘खेल-खेल में सीखने’ और ‘करके सीखने’  की अवधारणा को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने हरे रंग का स्वास्थ्य संबंधी महत्व बताते हुए कहा कि हरा रंग हमारी आँखों की रोशनी और मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। इस कार्यक्रम को और प्रेरणादायी बनाते हुए निदेशक ने अपने संबोधन में कहा, “हम केवल बच्चों को किताबें पढ़ना नहीं सिखा रहे, बल्कि हम उस भावी पीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं जो इस धरती की रक्षक बनेगी। प्रकृति से जुड़कर सीखना ही सच्चा ज्ञान है, और यही बच्चे कल हमारे पर्यावरण की ढाल बनेंगे।”
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