भारत में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है और घरेलू बाजार में इसके दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। थोक मूल्य जहाँ 5500 रुपए प्रति क्विंटल के करीब है वहीं बिहार में खुदरा मूल्य 62 से 65 रुपए प्रति किलो हो गया है। बाजार जानकारों के अनुसार उत्तर प्रदेश में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री भाव 18 अगस्त को बढ़कर 5,400 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। इस कीमत पर 5 प्रतिशत जीएसटी अलग से लागू है। महाराष्ट्र में भी एक्स-फैक्ट्री कीमत करीब 5,300 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि जीएसटी जोड़ने के बाद यह 5,550-5,600 रुपये तक पहुंच रही है। इस कारण खुदरा मूल्य देश स्तर पर 62 से 65 रुपए प्रति किलो हो गया है।
चीनी की कीमतों में अगस्त के दौरान ही करीब 20 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। महाराष्ट्र के प्रमुख चीनी कारोबार केंद्र कोल्हापुर में थोक भाव बढ़कर करीब 5,350 रुपये प्रति 100 किलोग्राम हो गया है। वहीं दिल्ली में स्पॉट कीमत करीब 5,775 रुपये और मुजफ्फरनगर में 5,754 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है। दिल्ली का थोक भाव भी करीब 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
थोक बाजार में चीनी का भाव करीब दो महीने पहले 4,400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास था, जो अब बढ़कर लगभग 5,800 रुपये हो गया है। यानी इस अवधि में कीमतों में करीब 32 फीसदी की वृद्धि हुई है। खुदरा बाजार में भी कुछ स्थानों पर चीनी 58-60 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। हालांकि, उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के अनुसार देश में चीनी का औसत दैनिक खुदरा भाव 51.68 रुपये प्रति किलो है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के कारण सरकार की चिंता और बढ़ गई है। अगर मौजूदा तेजी जारी रहती है तो खाद्य महंगाई पर इसका असर पड़ सकता है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार मौजूदा तेजी की बड़ी वजह चीनी उत्पादन के शुरुआती अनुमानों और वास्तविक उत्पादन के बीच अंतर है। इसके अलावा चीनी के निर्यात और गन्ने से बनने वाले फीडस्टॉक के एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्जन से सीजन के अंत तक उपलब्ध स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। अनुमान है कि 30 सितंबर 2026 तक भारत का क्लोजिंग शुगर स्टॉक 30-33 लाख टन रह सकता है। यदि ऐसा हुआ तो यह कई दशकों के सबसे निचले स्तरों में से एक होगा। इससे 2026-27 के नए चीनी सीजन की शुरुआत में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
कीमतों पर नियंत्रण और जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी पर स्टॉक लिमिट लागू की है। चीनी मिलों में मौजूद स्टॉक के भौतिक सत्यापन का आदेश भी दिया गया था। सरकार ने चीनी मिलों पर बाजार में सट्टेबाजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
14 अगस्त को चीनी निदेशालय की ओर से मिलों को भेजे पत्र में कहा गया कि कुछ मिलों के पास घोषित मात्रा से अधिक स्टॉक पाया गया है। कुछ मामलों में सौदे तय होने के बाद भी डिलीवरी में देरी किए जाने की बात सामने आई है। सरकार ने चेतावनी दी है कि स्टॉक में गड़बड़ी मिलने पर शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 2025 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
उद्योग जगत का मानना है कि यदि कीमतों में तेजी जारी रही तो घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार को चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार करना पड़ सकता है। फिलहाल चीनी आयात पर 100 फीसदी कस्टम ड्यूटी लागू है। इस बीच चीनी मिलों ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए आगामी पेराई सीजन समय से पहले शुरू करने की पेशकश की है।
हालांकि, मिलों ने इसके बदले जीएसटी समेत कई रियायतों की मांग की है। सरकार की ओर से स्टॉक सत्यापन के आंकड़े जारी होने के बाद बाजार में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। अब सरकार के अगले कदम पर चीनी बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
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