एक बार फिर सुर्खियों में आया शिक्षा विभाग का स्थापना शाखा, एक शिक्षक से एक लिपिक द्वारा डेढ़ लाख घुस लेने के मामले पर डीईओ ने लिया संज्ञान, लिपिक से मांगा हाथों-हाथ जबाब पर जबाब नदारद

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Live News 24×7 के लिए कैलाश गुप्ता।
मोतिहारी। आज कल पूर्वी चंपारण की शिक्षा विभाग का स्थापना शाखा काफी सुर्खियों में है।

एक तरफ जहां चार वर्षों से अपनी पत्नी की गाढ़ी कमाई वेतन के लिए कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते अधिवक्ता पति की मौत हो जाती है, वहीं अपनी निलंबन तोड़वाने व कार्रवाई से बचने के लिए लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद कार्रवाई से बंचित नहीं होने और दिए गए रुपये वापस नहीं मिलने का मामला भी जोर पकड़ लिया है।

बताया जाता है कि इस तरह के मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी की तत्परता यह स्पष्ट करता है कि स्थापना शाखा के लिपिकों की अब खैर नहीं है।

गौरतलब हो कि गत दिनों शिक्षिका पति अधिवक्ता की मौत और उनके वेतन भुगतान में विलंब के दोषी स्थापना शाखा के अधिकारी सहित संबंधित तीन लिपिकों के विरुद्ध कार्रवाई अभी पूरा हुआ भी नही है कि पुनः एक शिक्षक अनिल कुमार यादव के द्वारा अपनी निलंबन तोड़वाने और कार्रवाई से बचने के लिए स्थापना शाखा के लिपिक शिवनाथ विद्यार्थी के द्वारा खर्चे के नाम पर मो. डेढ़ लाख रुपये लेने के बावजूद शिक्षक अनिल कुमार का कार्रवाई से बंचित नही होना और तयनुसार कार्य नहीं होने के उपरांत शिक्षक श्री अनिल के द्वारा अपनी दी गई राशि की मांग करने पर लिपिक श्री विद्यार्थी द्वारा नहीं लौटने और आना-कानी करने के कारण शिक्षक श्री अनिल ने जिला शिक्षा पदाधिकारी के समक्ष आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

वहीं सूचनानुसार आवेदन प्राप्त होते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लिपिक श्री विद्यार्थी से हाथों हाथ जबाब मांगा है। कार्यालय सूत्रों से मिली सूचनानुसार समाचार सम्प्रेषण तक लिपिक श्री विद्यार्थी द्वारा जबाब नहीं दिया गया था।

यह भी विदित हों कि विगत माह पूर्व भी शिक्षक श्री अनिल के मौखिक शिकायत पर जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री गिरी ने 8 अप्रैल 26 को पत्र देकर लिपिक श्री विद्यार्थी से जबाब मांगा था परन्तु उक्त पत्र का भी जबाब अबतक अप्राप्त है।

ऐसे में जहाँ शिक्षकों में यह चर्चा है कि बिना पैसा दिए स्थापना शाखा से वेतन लेना भी मुश्किल है। वहीं आमजनों में यह चर्चा है कि क्या शिक्षकों को अब अपना बकाया/लंबित वेतन आदि लेने के लिए शिक्षकों/परिजनों को अपनी प्राण की आहुति देनी पड़ेगी…बहराल देखना यह है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी ऐसे लिपिकों से कैसे निपटते है।

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