झारखंड में साइबर ठगों ने अब सरकारी योजनाओं की आड़ में अस्पतालों को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के मुंधड़ा हॉस्पिटल से सामने आए एक ताजा मामले ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की नींद उड़ा दी है। ठगों ने खुद को आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) का बड़ा अधिकारी बताकर न केवल अस्पताल को बंद कराने की धमकी दी, बल्कि मामला रफा-दफा करने के लिए मोटी रकम की भी मांग की।
कैसे बुना गया ठगी का जाल? (Modus Operandi)
फर्जी नोडल अफसर: जालसाज ने अस्पताल प्रबंधक वरुण मुंधड़ा को फोन किया और खुद को आयुष्मान भारत योजना का ‘स्टेट नोडल ऑफिसर’ बताया।
गंभीर शिकायतों का डर: ठग ने दावा किया कि अस्पताल के खिलाफ केंद्र सरकार को गंभीर शिकायतें मिली हैं और एक केंद्रीय टीम जांच के लिए जल्द ही अस्पताल पहुंचने वाली है।
डिजिटल अरेस्ट की धमकी: उसने प्रबंधक को डराया कि जांच के बाद अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और प्रबंधन को गिरफ्तार किया जा सकता है।
सौदेबाजी का खेल: जब अस्पताल प्रबंधन घबरा गया, तो आरोपी ने ‘मामला सुलझाने’ के बदले पैसों की मांग शुरू कर दी।
प्रबंधन की सूझबूझ और ‘नेशनल इंश्योरेंस’ की एंट्री
मुंधड़ा अस्पताल के प्रबंधक ने झांसे में आने के बजाय तुरंत इसकी शिकायत आयुष्मान भारत से संबद्ध नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को मेल के जरिए की। कंपनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी को सौंप दिया है।
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी का कड़ा निर्देश
सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने राज्य के सभी सूचीबद्ध अस्पतालों और आम जनता के लिए तत्काल प्रभाव से एडवाइजरी जारी की है:
पहचान की पुष्टि: कोई भी सरकारी अधिकारी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करता है।
तुरंत करें रिपोर्ट: यदि किसी अस्पताल को ऐसा संदिग्ध फोन आता है, तो तुरंत नामकुम स्थित सोसाइटी के कार्यालय या नजदीकी थाने को सूचित करें।
गोपनीयता बरतें: अस्पताल अपनी लॉगिन आईडी और संवेदनशील डेटा किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।
साइबर सेल की जांच शुरू
झारखंड साइबर पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और लोकेशन को ट्रेस कर रही है जिससे यह कॉल किया गया था। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे अंतर्राज्यीय गिरोह का हाथ हो सकता है जो अस्पतालों के डेटा का इस्तेमाल कर उन्हें डरा रहा है।
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