झारखंड के कोडरमा जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार (25 मार्च 2026) की देर रात जिला मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर दूर मरियमपुर और बोनाकाली इलाके में हाथियों के एक झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। इस हमले में एक महिला समेत दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल है। शहरी क्षेत्र के इतने करीब हाथियों के इस हिंसक हमले से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा है और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
रात के अंधेरे में हमला: सोते हुए और रखवाली कर रहे लोगों को बनाया निशाना
हाथियों का झुंड देर रात अचानक रिहायशी इलाके में घुस आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथियों ने दो अलग-अलग जगहों पर हमला किया:
पहली घटना (बोनाकाली): खेत की रखवाली कर रहे देवघर निवासी मजदूर बालेश्वर सोरेन (40 वर्ष) पर हाथी ने हमला कर दिया। बालेश्वर को संभलने का मौका तक नहीं मिला और हाथी ने उन्हें कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
दूसरी घटना (मरियमपुर): इसके बाद हाथियों का झुंड मरियमपुर पहुंचा, जहां घर के बाहर सो रही मुनिया बिरहोर (55 वर्ष) को हाथियों ने अपना शिकार बनाया। हमले में मुनिया की भी जान चली गई, जबकि उनके साथ सो रही आरती बिरहोर गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है।
वन विभाग की ‘टॉर्च’ वाली कोशिश पर भड़के ग्रामीण
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उनके पास हाथियों को खदेड़ने के लिए कोई आधुनिक उपकरण नहीं थे।
लापरवाही का आरोप: ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग की टीम सिर्फ एक टॉर्च के सहारे हाथियों को खदेड़ने की कोशिश कर रही थी, जो पूरी तरह नाकाम रही।
आक्रोश: लोगों का कहना है कि अगर समय रहते हाथियों को लोकेट कर लिया जाता, तो दो जानें बच सकती थीं। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मुआवजे का ऐलान और सुरक्षा के निर्देश
कोडरमा वन विभाग के रेंजर राम बाबू ने बताया कि मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता के रूप में 25-25 हजार रुपये नकद दिए गए हैं।
कुल मुआवजा: सरकारी प्रावधान के अनुसार, मृतकों के आश्रितों को कुल 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
अलर्ट जारी: वन विभाग ने मरियमपुर, बोनाकाली और बागीटांड के लोगों को अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि हाथियों का झुंड अभी भी कोडरमा घाटी के जंगलों में डेरा जमाए हुए है, इसलिए लोग रात में अकेले बाहर न निकलें।
कोडरमा में बढ़ता ‘मैन-एनिमल’ संघर्ष
बता दें कि पिछले एक साल में कोडरमा और आसपास के इलाकों (जयनगर, मरकच्चो) में हाथियों के हमले में आधा दर्जन से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। कोडरमा घाटी क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट लगातार बना हुआ है, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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