पश्चिम एशिया में जारी भीषण जंग को रोकने के लिए अब पर्दे के पीछे से बड़ी कूटनीतिक बिसात बिछाई जा रही है। खबर है कि कट्टर दुश्मन माने जाने वाले अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका इस बार पाकिस्तान निभा रहा है। चर्चा यहाँ तक है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो सकती है। हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक पर अभी भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। वाशिंगटन से आ रही खबरों के मुताबिक, अमेरिका को पाकिस्तान में ‘सुरक्षा व्यवस्था’ को लेकर गहरी चिंताएं हैं, जिसके चलते उसने मेजबानी के इस प्रस्ताव पर फिलहाल मुहर नहीं लगाई है।
‘पाकिस्तान पूरी तरह सुरक्षित’ सुरक्षा चिंताओं पर इस्लामाबाद की सफाई
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दो टूक कहा, “पाकिस्तान बहुत सुरक्षित देश है और मुझे नहीं लगता कि सुरक्षा को लेकर जताई जा रही चिंताएं सही हैं।” पाकिस्तान का यह बयान उन दावों के जवाब में आया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका अपनी हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन की सुरक्षा को लेकर इस्लामाबाद पर भरोसा नहीं कर पा रहा है।
शहबाज शरीफ का बड़ा दांव: मेजबानी को बताया ‘सम्मान की बात’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इस पहल की कमान संभाली है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर घोषणा की कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान एक निर्णायक बातचीत को सुगम बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। शरीफ ने इसे पाकिस्तान के लिए ‘सम्मान की बात’ करार दिया। विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने और वैश्विक राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
15 बिंदुओं का प्रस्ताव और तीन देशों का साथ: कैसे बढ़ रही है बात?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने इस कूटनीतिक मिशन की पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान शुरू हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका ने 15 बिंदुओं का एक विस्तृत प्रस्ताव साझा किया है, जिस पर फिलहाल तेहरान विचार कर रहा है। इस शांति मिशन में तुर्किये और मिस्र जैसे देश भी पाकिस्तान का साथ दे रहे हैं। इसहाक डार ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को टैग करते हुए संकेत दिया कि बातचीत अब ‘अप्रत्यक्ष’ (Indirect) से ‘प्रत्यक्ष’ (Direct) होने की ओर बढ़ रही है।
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