उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर कानूनी पेंच और फंस गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार (25 मार्च) और आज (26 मार्च) समयाभाव के कारण इस मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ अब अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की इस जनहित याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई कर सकती है। इस देरी ने उन भावी उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ा दी है जो 26 मई से पहले चुनाव की उम्मीद लगाए बैठे थे।
हाईकोर्ट का सख्त रुख: ‘क्या 26 मई तक चुनाव संभव हैं?’
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को आड़े हाथों लिया था। कोर्ट ने आयोग को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा था कि:
मतदाता सूची का पेंच: क्या 15 अप्रैल 2026 तक मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद, अगले 40 दिनों के भीतर (यानी 26 मई तक) पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराना व्यावहारिक रूप से संभव है?
संवैधानिक बाध्यता: अनुच्छेद 243E के तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से 5 वर्ष (जो कि 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है) से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।
याचिकाकर्ता की दलील: बार-बार बदली गई तारीखें
याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन का तर्क है कि राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव टालने की कोशिश कर रहा है।
देरी का सिलसिला: पहले मतदाता सूची का काम दिसंबर 2025 में पूरा होना था, जिसे बढ़ाकर पहले मार्च 2026 और अब नवीनतम अधिसूचना के जरिए 15 अप्रैल कर दिया गया है।
आरक्षण प्रक्रिया: सूची फाइनल होने के बाद वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया में भी काफी समय लगेगा, जिससे चुनाव समय पर होने की संवैधानिक मर्यादा टूट सकती है।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर का दावा: “जुलाई तक होंगे चुनाव”
एक ओर जहां मामला कोर्ट में है, वहीं पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में दावा किया था कि प्रदेश में पंचायत चुनाव जुलाई 2026 तक संपन्न करा लिए जाएंगे। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार कार्यकाल समाप्त होने के बाद कुछ समय के लिए ‘प्रशासक’ (Administrators) की नियुक्ति पर विचार कर रही है।
कार्यकाल का गणित (एक नजर में):
| पंचायत स्तर | पहली बैठक की तारीख | कार्यकाल समाप्ति |
|---|---|---|
| ग्राम प्रधान | 27 मई 2021 | 26 मई 2026 |
| ब्लॉक प्रमुख | 20 जुलाई 2021 | 19 जुलाई 2026 |
| जिला पंचायत अध्यक्ष | 12 जुलाई 2021 | 11 जुलाई 2026 |
आगे क्या?
अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में राज्य निर्वाचन आयोग को अपना रोडमैप पेश करना होगा। यदि कोर्ट आयोग के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह चुनाव की तारीखों को लेकर कड़े निर्देश जारी कर सकता है। फिलहाल, यूपी के गांवों में चुनावी सुगबुगाहट तो तेज है, लेकिन आधिकारिक मुहर का सबको इंतजार है।
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