योगी सरकार के 8.65 लाख करोड़ के बजट में सिर्फ 60% खर्च, अब 6 दिन में 3.46 लाख करोड़ ठिकाने लगाने की बड़ी चुनौती

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के सामने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में एक बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, सरकार के कुल 8.65 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का अब तक केवल 60 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च हो पाया है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब एक सप्ताह से भी कम का समय बचा है। ऐसे में शासन से लेकर जिलों तक हड़कंप मचा हुआ है कि बाकी बचे 40 प्रतिशत (तकरीबन 3.46 लाख करोड़ रुपये) को महज 6 दिनों में कैसे इस्तेमाल किया जाए।

आंकड़ों का गणित: सुस्त रफ़्तार बनी मुसीबत

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने पहले 8.08 लाख करोड़ का मूल बजट पेश किया था, जो अनुपूरक बजट के बाद बढ़कर 8.65 लाख करोड़ रुपये हो गया था।

अब तक का खर्च: मार्च के अंतिम सप्ताह तक सभी विभाग मिलकर लगभग 5.19 लाख करोड़ रुपये ही खर्च कर सके हैं।

बकाया लक्ष्य: विभागों को अपना पूरा बजट बचाने के लिए अब बचे हुए दिनों में औसतन हर दिन 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने होंगे, जो व्यावहारिक रूप से नामुमकिन नजर आता है।

इन विभागों की स्थिति सबसे खराब (50% से भी कम खर्च):

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में उन विभागों पर कड़ी नाराजगी जताई है जिन्होंने बजट का आधा हिस्सा भी इस्तेमाल नहीं किया है।

पिछड़े विभाग: सिंचाई (निर्माण कार्य), संस्कृति, समाज कल्याण (जनजाति कल्याण), लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर विकास, और राजस्व (आपदा राहत) जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपनी आवंटित राशि का 50% भी खर्च नहीं कर पाए हैं।

बेहतर प्रदर्शन: ऊर्जा विभाग और महिला कल्याण विभाग ने 60% से अधिक का आंकड़ा पार कर अपनी स्थिति थोड़ी बेहतर रखी है।

बैंकों और दफ्तरों की छुट्टी ने बढ़ाई मुश्किल

31 मार्च तक कहने को तो 6 दिन बचे हैं, लेकिन वास्तविक कार्य दिवस (Working Days) बहुत कम हैं:

रामनवमी और अन्य अवकाश: गुरुवार और शुक्रवार (26-27 मार्च) को रामनवमी का अवकाश है।

बैंकों की बंदी: शनिवार को दफ्तर खुलेंगे लेकिन बैंकों में छुट्टी रहेगी।

महावीर जयंती: 31 मार्च को भी महावीर जयंती का सार्वजनिक अवकाश है।

ऐसे में विभागों के पास कागजी कार्रवाई और भुगतान (Payment) के लिए समय बहुत सीमित है।

अधिकारियों पर दबाव: ‘एडवांस पेमेंट’ के मौखिक निर्देश?

सूत्रों के अनुसार, बजट लैप्स (Lapse) होने से बचाने के लिए शासन स्तर पर भारी दबाव है। लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसे बड़े विभागों में चर्चा है कि अभियंताओं को मौखिक तौर पर ठेकेदारों को ‘एडवांस पेमेंट’ करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इसका इंजीनियरों के स्तर पर विरोध भी हो रहा है और इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत भी की गई है।

विपक्ष का हमला: “यह केवल कागजी विकास है”

इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि बड़े बजट के दावे केवल विज्ञापन के लिए हैं, धरातल पर काम न होने के कारण पैसा खर्च नहीं हो पा रहा है।

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