AIMIM नेता शौकत अली का विवादित बयान कहा मुसलमानों का एनकाउंटर करने वालों का भी होगा हिसाब

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उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर और कानून-व्यवस्था को लेकर जारी बहस के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने एक अत्यंत तीखा और विवादित बयान देकर सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। एक सार्वजनिक जनसभा को संबोधित करते हुए शौकत अली ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग आज चुन-चुनकर मुसलमानों का एनकाउंटर कर रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि वक्त बदलता है और कल उनका भी ‘एनकाउंटर’ हो सकता है। इस बयान के बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे भड़काऊ व सांप्रदायिक करार दिया है।

1. “कल कुर्सी आपकी नहीं होगी”: शौकत अली की चेतावनी

शौकत अली ने संभल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एनकाउंटर की आड़ में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

बयान का अंश: “आज आप सत्ता के नशे में चूर होकर एनकाउंटर कर रहे हैं, लेकिन याद रखिए, कुर्सियां हमेशा किसी की जागीर नहीं रहीं। कल जब वक्त बदलेगा और कोई दूसरी हुकूमत आएगी, तो उन्हीं अधिकारियों और नेताओं का भी एनकाउंटर होगा जिन्होंने आज नाइंसाफी की है।”

संवैधानिक मर्यादा पर सवाल: उन्होंने कहा कि अदालतों का काम अब सड़कों पर पुलिस कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

2. भाजपा का पलटवार: “अपराधियों की कोई जाति नहीं होती”

शौकत अली के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में अपराधी केवल अपराधी है, उसकी कोई जाति या धर्म नहीं देखा जाता।

प्रतिक्रिया: भाजपा ने कहा कि शौकत अली जैसे नेता तुष्टीकरण की राजनीति के लिए अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को धमका रहे हैं।

कानूनी कार्रवाई की मांग: सोशल मीडिया पर भी इस बयान की क्लिप वायरल होने के बाद कई हिंदू संगठनों ने शौकत अली के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।

3. यूपी में एनकाउंटर का सियासी गणित

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में हुए एनकाउंटर हमेशा से राजनीतिक चर्चा का केंद्र रहे हैं। समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस भी समय-समय पर ‘फेक एनकाउंटर’ के आरोप लगाती रही हैं, लेकिन शौकत अली का यह ‘बदले’ वाला बयान एक नए विवाद को जन्म दे गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनावों और आगामी उपचुनावों से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश के तहत ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।

4. पुलिस प्रशासन का रुख

सूत्रों के अनुसार, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने शौकत अली के भाषण की रिकॉर्डिंग मंगवाई है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि बयान से शांति व्यवस्था भंग हो सकती है या किसी विशेष वर्ग को उकसाया गया है, तो उन पर भड़काऊ भाषण (Hate Speech) की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

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