लखनऊ मास्टर प्लान में मानचित्र का खेल गोमती की लहरों पर बना दी सड़क, रिहायशी इलाकों में दिखा दिया जंगल

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नवाबों के शहर लखनऊ के भविष्य का खाका खींचने वाले ‘मास्टर प्लान’ में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की एक ऐसी बड़ी चूक सामने आई है, जिसने पूरे शहर के नियोजन (Planning) पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मास्टर प्लान-2031 (और पिछले 2016 के संदर्भों) के डिजिटल मानचित्रों में भारी विसंगतियां (Anomalies) पाई गई हैं। ताज़ा खुलासे के मुताबिक, कहीं गोमती नदी के बीचों-बीच सड़क दिखा दी गई है, तो कहीं घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों को कागजों पर ‘ग्रीन बेल्ट’ या जंगल घोषित कर दिया गया है। इस ‘मैप एरर’ के कारण हजारों संपत्तियों के भू-उपयोग (Land Use) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

1. गोमती नदी पर ‘कागजी’ सड़क का निर्माण

मास्टर प्लान के मानचित्र में सबसे हैरान करने वाली गलती गोमती नदी के प्रवाह क्षेत्र में देखी गई है। सर्वे और जीआईएस (GIS) मैपिंग के दौरान पाया गया कि मानचित्र में एक प्रस्तावित मुख्य मार्ग को गोमती नदी के ऊपर से गुजरते हुए दिखाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत में वहां कोई पुल या सड़क संभव ही नहीं है।

असर: इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण नदी किनारे की जमीनों का सीमांकन गलत हो गया है, जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल सकता है या वैध निर्माणों पर बुलडोजर का खतरा मंडरा सकता है।

2. रिहायशी इलाकों में ‘हरियाली’ और पार्कों में ‘मकान’

एलडीए के मास्टर प्लान में एक और बड़ी विसंगति यह है कि लखनऊ के कई पुराने और स्थापित मोहल्लों को ‘आवासीय’ के बजाय ‘पार्क’ या ‘खुला क्षेत्र’ दिखा दिया गया है।

त्रुटि: नक्शे में गड़बड़ी के कारण जो लोग दशकों से अपने घरों में रह रहे हैं, वे अब अपनी प्रॉपर्टी का नक्शा पास नहीं करा पा रहे हैं और न ही उन पर बैंक लोन ले पा रहे हैं।

विपरीत स्थिति: वहीं, शहर के कुछ हिस्सों में जहां वास्तव में ग्रीन बेल्ट या पार्क होने चाहिए थे, वहां मानचित्र में ‘कमर्शियल’ या ‘रेसिडेंशियल’ जोन मार्क कर दिया गया है।

3. जीआईएस मैपिंग और डेटा में अंतर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गड़बड़ी सैटेलाइट इमेज और पुराने मैनुअल डेटा के गलत तालमेल (Overlaying) की वजह से हुई है। मास्टर प्लान को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया में ग्राउंड-ट्रूथिंग (जमीनी सत्यापन) नहीं की गई।

LDA का पक्ष: मामले के तूल पकड़ने के बाद एलडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना है कि कुछ तकनीकी खामियां हैं। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है जो इन ‘मैप एरर्स’ को ठीक करेगी।

जनता की आपत्ति: एलडीए ने मास्टर प्लान पर जनता से आपत्तियां मांगी थीं, जिसमें 25,000 से अधिक शिकायतें केवल ‘गलत लैंड यूज’ को लेकर दर्ज की गई हैं।

4. क्या होगा आम आदमी पर असर?

यदि इन विसंगतियों को समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो:

नक्शा पास कराने में दिक्कत: घर बनाने या दुकान खोलने के इच्छुक लोगों को एलडीए से अनुमति नहीं मिलेगी।

भ्रष्टाचार को बढ़ावा: लेखपाल और निचले स्तर के कर्मचारी इन गड़बड़ियों का फायदा उठाकर लोगों को डरा सकते हैं।

विकास कार्यों में बाधा: गलत मानचित्र के आधार पर सड़कों या नालों का निर्माण भविष्य में बड़ी समस्या पैदा करेगा।

5. सुधार की प्रक्रिया शुरू

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के हस्तक्षेप के बाद, एलडीए अब इन त्रुटियों को सुधारने के लिए ड्रोन सर्वे और नए सिरे से स्थलीय निरीक्षण (Site Inspection) की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का दावा है कि अंतिम मास्टर प्लान-2031 के प्रकाशन से पहले इन सभी विसंगतियों को दूर कर लिया जाएगा ताकि शहर का विकास सुनियोजित तरीके से हो सके।

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