अगर आप नौकरीपेशा हैं और हर साल हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के जरिए टैक्स बचाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आयकर नियमों में क्रांतिकारी बदलावों को अधिसूचित कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ये नियम न केवल आपकी टैक्स सेविंग की गणना बदल देंगे, बल्कि पारदर्शिता के नाम पर अब आपको अपने मकान मालिक के साथ रिश्तों का ‘कच्चा चिट्ठा’ भी विभाग को देना होगा। नियमों की अनदेखी भविष्य में आपके लिए आयकर विभाग के नोटिस का सबब बन सकती है।
इन 8 शहरों में रहने वालों की चांदी, मिलेगा 50% छूट का फायदा
सरकार ने नए नियमों के तहत सैलरीड क्लास को बड़ी राहत देते हुए मेट्रो शहरों के दायरे का विस्तार किया है। अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई के साथ-साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी ‘हाई HRA छूट’ वाले शहरों की सूची में शामिल कर लिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन आठ शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब अपनी बेसिक सैलरी का 50 प्रतिशत तक HRA टैक्स छूट के रूप में क्लेम कर सकेंगे। अन्य शहरों के लिए यह सीमा अभी भी 40 प्रतिशत पर बरकरार रखी गई है। इससे आईटी और मैन्युफैक्चरिंग हब में काम करने वाले लाखों युवाओं को सीधा वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है।
मकान मालिक से क्या है रिश्ता? अब फॉर्म 124 में देनी होगी जानकारी
टैक्स चोरी और फर्जी रेंट रसीदों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब ‘फॉर्म 12BB’ को विदा कर दिया है और उसकी जगह नया फॉर्म 124 पेश किया है। अब HRA क्लेम करते समय आपको यह बताना अनिवार्य होगा कि मकान मालिक के साथ आपका क्या रिश्ता है। अक्सर देखा गया है कि लोग अपने माता-पिता या रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी रसीदें लगाकर टैक्स बचाते थे, लेकिन अब विभाग की नजर ऐसे ट्रांजैक्शन पर रहेगी। अगर आप अपने परिवार के किसी सदस्य को किराया दे रहे हैं, तो आपके पास वैध रेंट एग्रीमेंट होना चाहिए और भुगतान भी बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए ही करना सुरक्षित रहेगा।
कैसे होगी टैक्स छूट की गणना, समझें गणित
भले ही नियमों में सख्ती बढ़ी हो, लेकिन HRA कैलकुलेशन का मूल सिद्धांत वही रहेगा। छूट की राशि तीन स्थितियों में से जो सबसे कम होगी, उस पर तय की जाएगी: पहला कर्मचारी को मिला वास्तविक HRA; दूसरा सालाना चुकाए गए कुल किराए में से बेसिक सैलरी का 10 प्रतिशत घटाकर बची राशि; और तीसरा शहर के अनुसार सैलरी का 40 या 50 प्रतिशत हिस्सा। विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों के बाद अब कर्मचारियों को अपनी टैक्स प्लानिंग जुलाई 2027 में रिटर्न फाइल करने से काफी पहले ही शुरू कर देनी चाहिए।
शेयर बाजार और निवेश के लिए भी नई तैयारी
सैलरीड क्लास के लिए केवल घर का किराया ही नहीं, बल्कि निवेश के मोर्चे पर भी बदलाव किए गए हैं। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए अब रिकॉर्ड कीपिंग और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के लिए SEBI की मंजूरी की अनिवार्यता और लेन-देन के रिकॉर्ड को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, ताकि छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके।
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