Live News 24×7 के लिए मोतिहारी से कैलाश गुप्ता।
मोतिहारी। शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जहां विभाग बच्चों के मानसिक व सारीरिक विकास के लिए अरबों रुपये खर्च कर रही है वही विभाग के निचले स्तर के अधिकारी कागजी खानापूर्ति कर लूट खसोट में लगे है रहते है।अभी ताजा मामला विद्यालयों में क्रय किये जाने वाले खेल सामग्री का है जिसमें विभाग द्वारा राज्य के सभी प्राथमिक विद्यालय को 5-5 हजार, मध्य विद्यालय को 10-10 हजार तथा उच्च विद्यालयों को 25-25 हजार रुपये की खेल सामग्री क्रय करने का आदेश व आवंटन दिया गया। खेल सामग्री क्रय के लिए तीन सदस्यीय क्रय समिति का गठन भी किया गया जिसके माध्यम से खुला बाजार से मानक दर व गुणवत्तापूर्ण खेल सामग्री का क्रय किया जाना है परन्तु सूचनानुसार प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों व जिला के कुछ अधिकारियों के चहेते भेंडर व रिस्तेदारों के माध्यम से क्रय करने के लिए विद्यालय प्रभारियों पर दबाव भी दिया जा रहा है। बताया जाता है कि जिले में मात्र तीन ही दुकान है जहां खेल सामग्रियों का विक्रय किया जाता है। खेल सामग्री आपूर्ति में लगे भेंडरों में लगभग किसी भेंडर के पास दुकान नहीं है।
गौरतलब हो कि विद्यालयों में खेल सामग्री की आपूर्ति बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए की जाती है। प्रारंभिक विद्यालयों में फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट सेट, कैरम, बैडमिंटन, और हर्डल्स जैसे खेल उपकरण अनिवार्य हैं। माध्यमिक विद्यालयों में उच्च गुणवत्ता वाले फुटबॉल, क्रिकेट, और वॉलीबॉल नेट शामिल होते हैं।
खेल सामग्री में निम्नलिखित मुख्य चीजें शामिल हैं :
प्रारंभिक और माध्यमिक विद्यालयों के लिए प्रमुख खेल सामग्री :
गेंदें: फुटबॉल (नंबर 4 और 5), वॉलीबॉल, थ्रो बॉल, टेनिस बॉल।
खेल सेट: क्रिकेट बैट, स्टंप, बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक, कैरम बोर्ड (26″-34″)। एथलेटिक्स और फिटनेस: रिले बैटन, हर्डल्स (9 इंच), स्किपिंग रोप (कूदने वाली रस्सी)।
इनडोर खेल: शतरंज (लकड़ी के बोर्ड), कैरम बोर्ड।
अन्य सामग्री: किट बैग, हवा भरने वाला पंप, योग मैट, और रिले बैटन आदि।
वही बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने विद्यालय स्तर पर खेल सामग्री की खरीद को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परिषद की ओर से जारी पत्र के अनुसार स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एजुकेशन मद के तहत स्कूलों में खेल सामग्री की खरीद की जाएगी। यह पहल विद्यार्थियों में खेल भावना के विकास और शारीरिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है।
परिषद ने डीईओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी (प्रारंभिक एवं समग्र शिक्षा) को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि खेल सामग्री की खरीद के लिए प्रत्येक विद्यालय में त्रिसदस्यीय क्रय समिति का गठन अनिवार्य होगा। निर्देशानुसार क्रय समिति में विद्यालय के प्रधानाध्यापक, एक वरीय शिक्षक तथा शारीरिक शिक्षक अथवा अनुदेशक शामिल होंगे। यदि किसी विद्यालय में तीन से कम शिक्षक कार्यरत हैं तो प्रधानाध्यापक एवं एक शिक्षक के साथ विद्यालय शिक्षा समिति या विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा नामित एक सदस्य को क्रय समिति में शामिल किया जाएगा।
समिति ही आवश्यकतानुसार खेल सामग्रियों का चयन और क्रय सुनिश्चित करेगी। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि खेल सामग्री की खरीद बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, पटना द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर ही की जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खरीदी गई सामग्री का मूल्य अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तथा प्रचलित बाजार दर से अधिक न हो।
पत्र में कहा गया है कि विद्यालयों में आवश्यकता के अनुसार ही खेल सामग्री की खरीद की जाए और उसका विधिवत संधारण स्टॉक पंजी में दर्ज किया जाए। खेल सामग्रियों के रख-रखाव की जिम्मेदारी संबंधित शारीरिक शिक्षक अथवा नामित शिक्षक की होगी। परिषद ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
मजे की बात तो यह है जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी ने गत दिनांक 28 फरवरी 26 को ही पत्र जारी कर स्पस्ट आदेश दिया है कि हर हाल में 20 मार्च खेल सामग्रियों का क्रय कर लेना है परंतु खेल सामग्री क्रय में कथित अधिकारियों के दबाव के कारण अबतक खेल सामग्री की में खेल ही हो रहा है।
इधर पुनः कल 18 मार्च को एक पत्र जारी कर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विद्यालय प्रभारियों को मानक के विपरीत क्रय नही करने की चेतावनी भी दे दिया गया है।
जबकि दबे जुबान बताया जाता है कि स्वयं जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री गिरी के एक रिश्तेदार भी इस कार्य में लगे है।
वही यह भी बताया जाता है कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ढाका भी कुछ भेंडरों के प्रभाव में खेल सामग्री की बिना आपूर्ति कराए ही पीपीए कटवाने के लिए विद्यालय प्रभारियों पर दबाव बना रहें है। जब इस संबंध में उनसे वार्ता किया गया तो ये अपने को अनभिज्ञ बताते हुए कहा कि मैं तो अभी अभी प्रभार लिया हूं विभाग के बारे में मुझे विशेष जानकारी भी नहीं है कहकर बात टाल गए।
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