ISRO की बढ़ी टेंशन भारत के अपने GPS का दिल पड़ा कमजोर, अंतरिक्ष में फेल हुई सैटेलाइट की एटॉमिक क्लॉक क्या प्रभावित होगी आपकी लोकेशन?

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भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC (नाविक) को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे भारत के अपने ‘जीपीएस’ नेटवर्क की एक सैटेलाइट में तकनीकी खराबी आ गई है। जानकारी के मुताबिक, इस सैटेलाइट की ‘एटॉमिक क्लॉक’ (Atomic Clock) ने काम करना बंद कर दिया है। यह घड़ी नेविगेशन सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, जो सटीक समय और लोकेशन बताने के लिए जिम्मेदार है।

क्या होता है ‘एटॉमिक क्लॉक’ का काम? किसी भी नेविगेशन सैटेलाइट के लिए एटॉमिक क्लॉक उसका ‘दिल’ होती है। यह नैनो-सेकंड की भी सटीक गणना करती है। जब आप अपने फोन पर मैप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो सैटेलाइट इसी घड़ी के जरिए सिग्नल भेजती है जिससे आपकी सटीक स्थिति का पता चलता है। यदि यह घड़ी खराब हो जाए, तो सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा गलत हो सकता है या पूरी तरह बंद हो सकता है।

क्या ठप हो जाएगा भारत का नेविगेशन सिस्टम? इस खबर के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या उनके फोन में लोकेशन सेवा बंद हो जाएगी? ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के सूत्रों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। NavIC के पास बैकअप सैटेलाइट्स का एक समूह (Constellation) है। एक घड़ी फेल होने का मतलब पूरा सिस्टम ठप होना नहीं है, हालांकि यह इसरो के लिए एक बड़ी तकनीकी चुनौती जरूर है।

इसरो का अगला कदम: रिप्लेसमेंट की तैयारी यह पहली बार नहीं है जब किसी सैटेलाइट की घड़ी में खराबी आई है। इससे पहले भी कुछ सैटेलाइट्स के साथ ऐसी समस्या देखी गई थी। इसरो अब खराब हुई सैटेलाइट की जगह नई पीढ़ी के NVS-01 सीरीज के उपग्रहों को लॉन्च करने की प्रक्रिया तेज कर सकता है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की एक टीम लगातार इस खराबी का विश्लेषण कर रही है ताकि भविष्य के मिशनों में ऐसी त्रुटियों को टाला जा सके।

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